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सड़कों को गहरे जख्म दे गई बाढ़ और बारिश
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 01 Sep 2016 01:56 AM IST
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कॉलोनियों और सड़कों से उतरा बाढ़ का पानी अपने पीछे बरबादी के निशां छोड़ गया है। बाढ़ और बारिश सड़कों को गहरे जख्म दे गई है। हालत यह है कि कई सड़कों का तारकोल पानी में बह गया। इस वजह से गिट्टियां उधड़ गई हैं। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने के चलते आवागमन में दिक्कत आ रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति कैंट-लंका-सामने घाट मार्ग की है। बाढ़ और बारिश से पूरी तरह बर्बाद हुई यह सड़क टूटकर दो हिस्सों में बंट गई है।
बारिश से पहले कई सड़कें दुरुस्त कराई गई थीं। सावन मेला के मद्देनजर कई कांवरिया रूट गड्ढामुक्त कराए गए थे। इन पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे लेकिन बाढ़ और बारिश के अलावा सीवर का पानी इकट्ठा होने से ये सड़कें पहले से भी अधिक बदहाल हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर बने गड्ढे और इधर-उधर बिखरी गिट्टियों के बीच कब हादसा हो जाए कोई ठीक नहीं। चांदपुर-मंडुवाडीह मार्ग भी इन्हीं सड़कों में एक है। सावन मेला के मद्देनजर इसकी मरम्मत भी कराई गई थी लेकिन अब इस सड़क पर एक-एक फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनमें बारिश पानी भरने से मुसीबत और बढ़ गई है। लोग उसी पानी में से होकर गुजरने को विवश हैं।
यही हाल लंका संकटमोचन मार्ग का भी है। सड़क के गड्ढों में बारिश का पानी जमा है। इन गड्ढों में गिर-फिसलकर रोजाना राहगीर चोटहिल हो रहे हैं। दुर्गाकुंड, भेलूपुर, कमच्छा की सड़क को बारिश के चलते नुकसान पहुंचा है। कई जगह तो गड्ढे इतने गहरे हैं कि उसमें गिरने पर जान बचनी मुश्किल है। भेलूपुर जलसंस्थान के पास लगभग तीन सौ मीटर सड़क धंस गई है। शहर की ज्यादातर सड़कों के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम या लोक निर्माण विभाग के पास है मगर अभी कहीं मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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बाढ़, बारिश और सीवर से खराब हुई सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए 213 कार्य चिह्नित किए गए हैं। इन पर तकरीबन 78 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिले में 2711 किमी की सड़कें हैं। इनमें 100 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। 135 किलोमीटर प्रादेशिक मार्ग हैं। इनके अलावा 2476 किमी शहर और गांव की सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी की शहर में 112 किमी सड़कें हैं। इनमें से तकरीबन 25 प्रतिशत सड़कों की मरम्मत करानी पड़ेगी।
सड़कों को दुरुस्त करने के लिए पहले पीडब्ल्यूडी कास्मेटिक सर्जरी करेगा। इसके तहत पहले सड़कों के गड्ढे भरे जाएंगे। फिर उसे कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाएगा ताकि वाहनों के दबाव से सड़क अपना स्थान ले ले। इसके बाद इन सड़कों की लेवलिंग के बाद उन्हें नए सिरे से बनाया जाएगा। पहले चरण में शहर के प्रमुख मार्गों को दुरुस्त करेंगे। इसके बाद बाढ़ग्रस्त इलाकों की सड़कों की मरम्मत और निर्माण का काम शुरू होगा।
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बारिश से पहले कई सड़कें दुरुस्त कराई गई थीं। सावन मेला के मद्देनजर कई कांवरिया रूट गड्ढामुक्त कराए गए थे। इन पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे लेकिन बाढ़ और बारिश के अलावा सीवर का पानी इकट्ठा होने से ये सड़कें पहले से भी अधिक बदहाल हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर बने गड्ढे और इधर-उधर बिखरी गिट्टियों के बीच कब हादसा हो जाए कोई ठीक नहीं। चांदपुर-मंडुवाडीह मार्ग भी इन्हीं सड़कों में एक है। सावन मेला के मद्देनजर इसकी मरम्मत भी कराई गई थी लेकिन अब इस सड़क पर एक-एक फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनमें बारिश पानी भरने से मुसीबत और बढ़ गई है। लोग उसी पानी में से होकर गुजरने को विवश हैं।
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यही हाल लंका संकटमोचन मार्ग का भी है। सड़क के गड्ढों में बारिश का पानी जमा है। इन गड्ढों में गिर-फिसलकर रोजाना राहगीर चोटहिल हो रहे हैं। दुर्गाकुंड, भेलूपुर, कमच्छा की सड़क को बारिश के चलते नुकसान पहुंचा है। कई जगह तो गड्ढे इतने गहरे हैं कि उसमें गिरने पर जान बचनी मुश्किल है। भेलूपुर जलसंस्थान के पास लगभग तीन सौ मीटर सड़क धंस गई है। शहर की ज्यादातर सड़कों के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम या लोक निर्माण विभाग के पास है मगर अभी कहीं मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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बाढ़, बारिश और सीवर से खराब हुई सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए 213 कार्य चिह्नित किए गए हैं। इन पर तकरीबन 78 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिले में 2711 किमी की सड़कें हैं। इनमें 100 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। 135 किलोमीटर प्रादेशिक मार्ग हैं। इनके अलावा 2476 किमी शहर और गांव की सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी की शहर में 112 किमी सड़कें हैं। इनमें से तकरीबन 25 प्रतिशत सड़कों की मरम्मत करानी पड़ेगी।
सड़कों को दुरुस्त करने के लिए पहले पीडब्ल्यूडी कास्मेटिक सर्जरी करेगा। इसके तहत पहले सड़कों के गड्ढे भरे जाएंगे। फिर उसे कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाएगा ताकि वाहनों के दबाव से सड़क अपना स्थान ले ले। इसके बाद इन सड़कों की लेवलिंग के बाद उन्हें नए सिरे से बनाया जाएगा। पहले चरण में शहर के प्रमुख मार्गों को दुरुस्त करेंगे। इसके बाद बाढ़ग्रस्त इलाकों की सड़कों की मरम्मत और निर्माण का काम शुरू होगा।