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बांसुरी के जादूगर हरि प्रसाद की रागदारी ने बनाया दीवाना

ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 29 Apr 2016 02:18 AM IST
संकटमोचन संगीत समारोह में बांसुरी बजाते पं. हरि प्रसाद चौरसिया।
संकटमोचन संगीत समारोह में बांसुरी बजाते पं. हरि प्रसाद चौरसिया।
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मोहिनी अट्टम पर भावों की लचक दिल में उतरी तो बांसुरी के जादूगर पं. हरि प्रसाद चौरसिया की रागदारी ने संगीत रसिकों को दीवाना बना दिया। गायकी भी ख्याल के अंदाज में खूब परवान चढ़ी। संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा गायन, वादन और नृत्य का अनूठा संगम ऐसी ही जीवंत प्रस्तुतियों को लेकर बना। सुर और ताल की बारिश में रात भर श्रोता भीगते, झूमते, नहाते रहे।


शुरुआत हुई मोहिनीअट्टम नृत्य से। केरल की शास्त्रीय नृत्य शैली को लेकर मंच पर आईं भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की भाभी मॉम गांगुली। मॉम अपनी शिष्याओं गार्गी नियोगी, बार्था विश्वास, पौलुमी मुखर्जी व अन्वेषा बसारव के साथ मोहिनी अट्टम के भावों को गणेश-शिव-श्रीराम स्तुति में निबद्ध किया। इसके बाद उत्तर भारतीय कर्नाटक संगीत पर आधारित बैले के दौरान उन्होंने भावों, ईशारों के जरिए लोगों का ध्यान खींचा। मोहिनी अट्टम में उभरे भाव अंग को दर्शक जीते नजर आए। इनके बाद बारी आई पद्मविभूषण पं. हरि प्रसाद की।


उन्होंने बांसुरी पर राग विहाग की अवतारणा की। ध्रुपद अंग में अलाप, जोड़, झाला के बाद मध्य लय एवं द्रुत लय की बंदिशें बजाकर तालियां बटोरीं। इसके बाद राग दुर्गा की अवतारणा कर संकट मोचन के दरबार में रागों की नई खुशबू घोल दी। इस दौरान स्वरों में सेनिया-मैहर घराने की उन्होंने छाप छोड़ी। हरि प्रसाद ने जता दिया कि उम्र दरवाजे पर आती जरूर है लेकिन उन पर सवार नहीं होती। राग पहाड़ी में बंदिश बजाकर उन्होंने विराम लिया। तबले पर शुभंकर बनर्जी और पखावज पर पं. भवानीशंकर ने संगत की। इनके बाद पद्मश्री सोमा घोष की। सोमा ने कर्ण सिंह की कविता- हे नटराज शिव शंकर महादेव वजरंग बली... से शुरुआत की।

इसके बाद उन्होंने राग हंसध्वनि में निबद्ध तीन ताल की बंदिश- लागी लगन... से संगीत निशा को सुरों से परवान चढ़ाया। फिर राग खमाज में बनारस अंग की ठुमरी-मोरा श्याम न आए... की प्रस्तुति की। तबले पर पं. ललित कुमार, हारमोनियम पर पंकज मिश्र, आक्टोपैड पर हंसराज और सिंथेसाइजर पर हेमंत ने संगत की। फिर पं. कुमार बोस और रोहन बोस ने तबले पर तीन ताल में कायदा, रेला, उठान, टुकड़ा, परन, तिहाई, बाट की बेजोड़ प्रस्तुति की। उन्होंने पं. किशन महाराज, गोदई महाराज और अनोखे लाल की बंदिशों को भी बजाया। हारमोनियम पर लहरा दिया पं. धर्मनाथ मिश्र ने।

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