{"_id":"60e5fb3c8ebc3e0a217c2d07","slug":"the-wait-is-over-after-four-years-preparations-for-entering-research-begin-varanasi-news-vns59922787","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंतजार खत्म, चार साल बाद शोध में प्रवेश की तैयारी शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंतजार खत्म, चार साल बाद शोध में प्रवेश की तैयारी शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ में पीएचडी में दाखिला लेने वालों का इंतजार खत्म हो गया है। काशी विद्यापीठ ने प्रवेश के लिए आवेदन ऑनलाइन कर दिए हैं और लगभग पांच हजार से अधिक छात्रों ने आवेदन किए हैं। वहीं संपूर्णानंद में चार साल बाद विद्यावारिधी (पीएचडी) में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। प्रवेश प्रक्रिया के लिए प्रवेश समिति का गठन कर दिया गया है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 2020 से हर साल शोध प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। काशी विद्यापीठ में 2020 में 531 सीटों के लिए 5312 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। इसके पहले 2017 में शोध प्रवेश परीक्षा कराई गई थी। वर्तमान सत्र में 631 सीटों के लिए तीन अप्रैल से शोध प्रवेश परीक्षा के आवेदन ऑनलाइन कर दिए गए थे लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए पांच बार प्रवेश आवेदन की तिथि को बढ़ाया गया। प्रवेश परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई और शुल्क जमा करने की तिथि नौ जुलाई निर्धारित की गई है।
वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने चार साल बाद शोध प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी के निर्देश पर प्रवेश समिति का गठन किया गया। बुधवार को प्रवेश समिति की पहली बैठक में प्रवेश की रूपरेखा पर चर्चा की गई। कुलसचिव ओमप्रकाश ने बताया कि जल्द ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट
विश्वविद्यालय व संबद्ध कालेजों के नियमित अध्यापकों को प्रवेश परीक्षा से छूट होगी। इसके अलावा नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी प्रवेश परीक्षा से छूट होगी। इसी प्रकार एनआरआइ, जेआरएफ, सीएसआइआर, आइसीएआर या अन्य केंद्रीय संस्थाओं से फेलोशिप पाने वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी।
छह माह का कोर्स वर्क अनिवार्य
शोधार्थियों को छह माह कोर्स वर्क अनिवार्य रूप से करना होगा। कोर्स वर्क की क्वालिफाइंग परीक्षा कराई जाएगी। पास होने के लिए प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 50 फीसदी अंक अनिवार्य है। कोर्स वर्क की क्वालिफाइंग परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों का ही पीएचडी में पंजीकरण किया जाएगा।
जारी की गई शोध निर्देशकों की सूची
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने 36 शोध निर्देशकों की सूची ऑनलाइन जारी कर दी है। इसमें विश्वविद्यालय के अलावा संबद्ध महाविद्यालय के शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। वाणिज्य विभाग में हरिश्चंद्र महाविद्यालय के डॉ. अनिल प्रताप सिंह, डॉ. अतुल कुमार तिवारी, मनोविज्ञान में डॉ. मुकेश कुमार पंथ, डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय, महाराजा बलवंत सिंह पीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के डॉ. मिथिलेश सिंह, जीडी बिनानी पीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. अशोक कुमार सिंह। राजनीति विज्ञान के लिए केबीपीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. रविंद्र कुमार द्विवेदी, डॉ. अशोक कुमार चंदेल, डॉ. राकेश कुमार शुक्ल, शहीद हीरा सिंह राजकीय पीजी कॉलेज धानापुर के डॉ. सुभाष राम, सकलडीहा पीजी कॉलेज चंदौली के डॉ. अरुण कुमार उपाध्याय, डॉ. शमीन राईन, श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय पीजी कॉलेज लालगंज मिर्जापुर के डॉ. जितेंद्र कुमार पांडेय, सावित्री बाई फूले राजकीय पीजी कॉलेज चकिया की डॉ. प्रियंका पटेल, काशी विद्यापीठ के डॉ. रेशम लाल। समाजशास्त्र के लिए 20 शिक्षक नामित किए गए हैं।
विज्ञापन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 2020 से हर साल शोध प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। काशी विद्यापीठ में 2020 में 531 सीटों के लिए 5312 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। इसके पहले 2017 में शोध प्रवेश परीक्षा कराई गई थी। वर्तमान सत्र में 631 सीटों के लिए तीन अप्रैल से शोध प्रवेश परीक्षा के आवेदन ऑनलाइन कर दिए गए थे लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए पांच बार प्रवेश आवेदन की तिथि को बढ़ाया गया। प्रवेश परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई और शुल्क जमा करने की तिथि नौ जुलाई निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने चार साल बाद शोध प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी के निर्देश पर प्रवेश समिति का गठन किया गया। बुधवार को प्रवेश समिति की पहली बैठक में प्रवेश की रूपरेखा पर चर्चा की गई। कुलसचिव ओमप्रकाश ने बताया कि जल्द ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट
विश्वविद्यालय व संबद्ध कालेजों के नियमित अध्यापकों को प्रवेश परीक्षा से छूट होगी। इसके अलावा नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी प्रवेश परीक्षा से छूट होगी। इसी प्रकार एनआरआइ, जेआरएफ, सीएसआइआर, आइसीएआर या अन्य केंद्रीय संस्थाओं से फेलोशिप पाने वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी।
छह माह का कोर्स वर्क अनिवार्य
शोधार्थियों को छह माह कोर्स वर्क अनिवार्य रूप से करना होगा। कोर्स वर्क की क्वालिफाइंग परीक्षा कराई जाएगी। पास होने के लिए प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 50 फीसदी अंक अनिवार्य है। कोर्स वर्क की क्वालिफाइंग परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों का ही पीएचडी में पंजीकरण किया जाएगा।
जारी की गई शोध निर्देशकों की सूची
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने 36 शोध निर्देशकों की सूची ऑनलाइन जारी कर दी है। इसमें विश्वविद्यालय के अलावा संबद्ध महाविद्यालय के शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। वाणिज्य विभाग में हरिश्चंद्र महाविद्यालय के डॉ. अनिल प्रताप सिंह, डॉ. अतुल कुमार तिवारी, मनोविज्ञान में डॉ. मुकेश कुमार पंथ, डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय, महाराजा बलवंत सिंह पीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के डॉ. मिथिलेश सिंह, जीडी बिनानी पीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. अशोक कुमार सिंह। राजनीति विज्ञान के लिए केबीपीजी कॉलेज मिर्जापुर के डॉ. रविंद्र कुमार द्विवेदी, डॉ. अशोक कुमार चंदेल, डॉ. राकेश कुमार शुक्ल, शहीद हीरा सिंह राजकीय पीजी कॉलेज धानापुर के डॉ. सुभाष राम, सकलडीहा पीजी कॉलेज चंदौली के डॉ. अरुण कुमार उपाध्याय, डॉ. शमीन राईन, श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय पीजी कॉलेज लालगंज मिर्जापुर के डॉ. जितेंद्र कुमार पांडेय, सावित्री बाई फूले राजकीय पीजी कॉलेज चकिया की डॉ. प्रियंका पटेल, काशी विद्यापीठ के डॉ. रेशम लाल। समाजशास्त्र के लिए 20 शिक्षक नामित किए गए हैं।