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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   The tune from the flute, sometimes pain and sometimes happiness

Varanasi News: बांसुरी से निकली धुन, कभी वेदना तो कभी खुशी

Sat, 11 Apr 2026 02:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 02:04 AM IST
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The tune from the flute, sometimes pain and sometimes happiness
संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी प्रस्तुति बांसुरी की रही। संकट मोचन में हाजिरी लगाने मुंबई से अपने बेटे ऋषिकेश मजूमदार संग आए पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी से निकली धुन ने श्रोताओं को विभोर किया। श्रोताओं में कभी वेदना तो कभी खुशी, कभी डर तो कभी रोमांच पैदा दिया। तबले की ना-धिन-धिन-ना के साथ बांसुरी की धुन तरंगों जैसी मंदिर में फैल रही थी। पं. पन्नालाल घोस के बांसुरी वादन से खुद को प्रेरित बताते हुए रोनू मजूमदार ने अपने बेटे हृषिकेश के साथ राग दरबारी कान्ह्ड़ा बजाया। फिर राग भूपाली सहित दक्षिण भारत की शैली में बांसुरीवादन किया। गायकी अंग के वादन में आलाप के बाद स्वर विस्तार और गमक का शानदार इस्तेमाल किया। बांसुरी के साथ लंबी-लंबी तानें लीं। तबले पर रोहन बोस ने शानदार संगत की। बांसुरी वादन में ही पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... की गायकी करने लगे तो महावीर का आंगन शास्त्रीय से भजन दरबार में बदल हो गया। फिर छाप तिलक सब छिनी... गाकर श्रोताओं पर सूफियाना रंग छोड़ दिया। मंच पर आते ही रोनू मजूमदार ने अपने बनारसी अंदाज से परिचय कराया। बेटे की ओर इशारा करते हुए कहा कि एनके बतावत रहली कि मर्दवा का मतलब का होला। एनके ना मालूम हौ कि का होला।
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