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रविदास के विचारों में दिखता है सामाजिक समरसता का साक्षात रूप : रवींद्र

Mon, 13 Jul 2026 02:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:17 AM IST
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The true embodiment of social harmony is evident in Ravidas's ideas: Ravindra
वाराणसी में रविवार को सीर गोर्वधन ​स्थित संत रविदास मंदिर में संत को स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानि
सीरगोवर्धनपुर स्थित संत गुरु श्री रविदास जन्मस्थली पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के कुटुंब प्रबोधन के रामलला गट की ओर से सद्गुरु पूजनोत्सव एवं महंत भारत भूषण सम्मान समारोह हुआ। यहां पर रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन संयोजक रवींद्र शंकर जोशी ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता का साक्षात रूप दिखाई देता है। मनुष्य के आध्यात्मिक विकास में सबसे बड़ा शत्रु अहंकार है। राम की कृपा से सब संभव होगा। यह श्रद्धा हममें होनी चाहिए।
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बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने कहा कि हरि का भजे सो हरि का होय...। यह पंक्ति इस तथ्य को बल प्रदान करती है कि ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखने से ईश्वर की कृपा समान रूप से प्राप्त होती है। इसमें जाति की श्रेष्ठता का कोई महत्व नहीं रहता। संत गुरु रविदास ने स्वयं यह स्वीकार किया कि जूते-चप्पल बनाने के कारण समाज में वह सबसे निम्न स्थान पर रहे लेकिन राम का नाम लेने से उनका स्थान अत्यंत उच्च हो गया। अध्यक्षता करते हुए कैलाश मठ के महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी ने कहा कि भारतीय साहित्य में भेद करने का कोई भी उपक्रम वर्णित नहीं है।
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रविदास मंदिर के महंत भारत भूषण महाराज ने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रेष्ठ कार्य में लगा हुआ है उन सबके प्रति अपनत्व व प्रेम का भाव रखना आवश्यक है। मंदिर के महंत को अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न से सम्मानित किया। इस दौरान संगीतकार देवव्रत मिश्र ने रविदास के भजनों की प्रस्तुति दी। उनके शिष्य अनुराग ने आज दिवस लेउ बलिहारा, मेरे गृह आए राजा राम जी प्यारा और को बंजारो राम को, मेरा टांडा लादिया जाए रे... सहित कई भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी। संचालन काशी प्रांत के प्रांत कुटुम्ब संयोजक डॉ. शुकदेव ने किया। कार्यक्रम में मनसुख भाई सेठिया, काशी प्रांत के प्रांत संघ चालक अंगराज, विभाग संघचालक जयप्रकाश लाल, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण, प्रो. मंजू द्विवेदी, नीता आदि मौजूद रहीं।
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