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Varanasi News: ऐसो निठुर मोरा श्याम न आए, जिया न धरत अब धीर...

Mon, 24 Apr 2023 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Apr 2023 12:30 AM IST
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The third day of Thumri Festival adorned with the voices of young artists
ऐसो निठुर मोरा श्याम न आए, जिया न धरत अब धीर...
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युवा कलाकारों के सुरों से सजी ठुमरी महोत्सव की तीसरी निशा

बागेश्वरी देवी ठुमरी महोत्सव की तीसरी निशा युवा कलाकारों के नाम रही। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की मंशा के अनुसार डॉ. सोमा घोष ने युवा कलाकारों को मंच प्रदान किया। मधु मूर्च्छना और संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देर रात तक श्रोताओं ने ठुमरी के रस का आनंद लिया।
पांच दिवसीय आयोजन के तीसरे दिन रविवार को सनबीम लहरतारा के प्रांगण में कार्यक्रम की शुरुआत मैत्री तालुकदार ने ठुमरी ऐसो निठुर मोरा श्याम न आए, जिया न धरत अब धीर...से की। इसके बाद रंगदी सारी गुलाबी...के बाद रखियो बालम यही नजरिया...की सुमधुर प्रस्तुति दी। मुंबई से आई कथक नृत्यांगना श्रेष्ठा त्रिपाठी ने बनारस की पुरानी दादरा, जाओ कान्हा करो ना मोसे राढ़..पर नृत्य किया। गायन में मैत्री तालुकदार और लंदन से आई हुई शिष्य फरजाना शिफत ने सहयोग किया। फरजाना ने दादरा श्याम तोहे नजरिया लग जाएगी... और होरी रंग डारूंगी... पेश किया। डॉ. सोमा घोष ने अपने मधुर स्वर में काशी के नाथ, विश्वनाथ को श्रद्धा सुमन अर्पित कर ठुमरी महोत्सव को उनके चरणों में समर्पण किया। फिर उन्होंने ठुमरी, न मानूंगी, न मानूंगी, न मानूंगी, उनके मनाए बिना फिर दादरा मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो री... की प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने बेगम अख्तर की ठुमरी अंग की गाई हुई प्रस्तुतियों को स्वर दिया। सारंगी पर अनीश, हारमोनियम पर पंडित पंकज मिश्रा, पंडित ललित कुमार, नाजिश हुसैन खान ने तबला और सारंगी पर पंडित संदीप मिश्रा ने संगत की। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय, श्रीकांत श्रीवास्तव और डाॅ. सोमा घोष ने दीप जलाकर किया।
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बुजुर्ग कलाकार को करना चाहिए अगली पीढ़ी का स्वागत
वाराणसी। डॉ. सोमा घोष ने कहा कि जब भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के साथ मेरी पहली जुगलबंदी हुई थी तो उन्होंने कहा था, हर बुजुर्ग कलाकार का अगले पीढ़ी का स्वागत करना धर्म होता है। इसीलिए मैं सोमा का स्वागत कर रहा हूं। स्व. बागेश्वरी देवी की शिक्षा जो मुझे मिली है, वो मैं अपने शिष्यों को दे रही हूं और धीरे धीरे उन्हें श्रोताओं के समक्ष पेश कर रही हूं। आज उस कड़ी की शुरुआत है।
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आज से शुरू होगी ठुमरी की कार्यशाला
डॉ. सोमा घोष ने बताया कि पांच दिवसीय बागेश्वरी देवी ठुमरी महोत्सव के चौथे और पांचवें दिन ठुमरी कार्यशाला होगी। 24 और 25 अप्रैल को सनबीम इंग्लिश स्कूल भगवानपुर में कार्यशाला में बच्चों को ठुमरी की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।
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