{"_id":"58ee8e2b4f1c1bbc7fcf6657","slug":"the-specialty-of-the-school-with-special-permit","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्पेशल परमीशन से विद्यापीठ की सांसत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्पेशल परमीशन से विद्यापीठ की सांसत
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 13 Apr 2017 01:59 AM IST
विज्ञापन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धीरेंद्र महिला पीजी कॉलेज में बी वॉक (बैचलर ऑफ वोकेशनल कोर्स) की स्पेशल परमिशन के साथ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने संबद्धता तो दे दी लेकिन अब उसके इस फैसले पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विद्यापीठ ने एक साल पहले छात्र हित में मार्च 2016 में संबद्धता का लिखित आदेश जारी किया गया, जिसमें विशेष परिस्थिति में संबद्धता का जिक्र हैं।
कॉलेज को यूजीसी की ओर से 31 जुलाई, 2015 को इनफार्मेशन टेक्नालोजी और अप्लायड आर्ट पाठयक्रम चलाने की मान्यता मिली। कॉलेज ने प्रथम सेमेस्टर में दाखिला लेकर अगस्त माह में कक्षाएं संचालित करना शुरू कर दीं लेकिन विद्यापीठ की ओर से पाठ्यक्रम में संबद्धता का लिखित आदेश 10 मार्च, 2016 को जारी किया, जबकि संबद्धता के नियमों के हिसाब से पाठयक्रम संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही इसे शुरू किया जाना चाहिए।
कुलसचिव की ओर से कॉलेज प्रबंधक को जारी आदेश में एक जुलाई 2015 से तीन साल के लिए शर्तों के साथ संबद्धता देने का जिक्र हैं। सवाल यह है कि जब संबद्धता मार्च, 2016 में जारी हुई तो कॉलेज में प्रवेश के समय विश्वविद्यालय ने नियमों-परिनियमों के आधार पर पूर्व में ही जांच क्यों नहीं की। उधर, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि कॉलेज ने विश्वविद्यालय को यूजीसी की मान्यता के साथ ही प्रवेश और परीक्षा कराने की समय से जानकारी दी, बावजूद इसके देरी की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कॉलेज को यूजीसी की ओर से 31 जुलाई, 2015 को इनफार्मेशन टेक्नालोजी और अप्लायड आर्ट पाठयक्रम चलाने की मान्यता मिली। कॉलेज ने प्रथम सेमेस्टर में दाखिला लेकर अगस्त माह में कक्षाएं संचालित करना शुरू कर दीं लेकिन विद्यापीठ की ओर से पाठ्यक्रम में संबद्धता का लिखित आदेश 10 मार्च, 2016 को जारी किया, जबकि संबद्धता के नियमों के हिसाब से पाठयक्रम संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही इसे शुरू किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
कुलसचिव की ओर से कॉलेज प्रबंधक को जारी आदेश में एक जुलाई 2015 से तीन साल के लिए शर्तों के साथ संबद्धता देने का जिक्र हैं। सवाल यह है कि जब संबद्धता मार्च, 2016 में जारी हुई तो कॉलेज में प्रवेश के समय विश्वविद्यालय ने नियमों-परिनियमों के आधार पर पूर्व में ही जांच क्यों नहीं की। उधर, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि कॉलेज ने विश्वविद्यालय को यूजीसी की मान्यता के साथ ही प्रवेश और परीक्षा कराने की समय से जानकारी दी, बावजूद इसके देरी की जा रही है।
विज्ञापन