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कृषि महकमे की भूमिका से खूब फला फूला कारोबार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 28 May 2016 02:08 AM IST
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कृषि महकमे की भूमिका से खूब फला फूला कारोबार
सूबे में धान के नकली बीज के नाम पर किसान लूटे जा रहे हैं और कृषि महकमा चैन की बंशी बजा रहा है। किसानों की गाढ़ी कमाई हजम करने के लिए पांच साल से चलाए जा रहे दामिनी ब्रांड के नकली बीज के इस कारोबार से परदा उठाना तो दूर, कृषि विभाग के अधिकारियों ने उधर झांकने तक की जरूरत नहीं समझी।
वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ समेत प्रदेश के कई मंडलों में इस बीज कारोबार में 25 से अधिक कंपनियां शामिल हैं। इस बीज के बारे में अमर उजाला में हुए खुलासे के बाद भी प्रशासन और कृषि विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंगी। प्रशासन ने कारोबारियों को आज का एक दिन दे दिया, जब वे नकली बीज को ठिकाने लगा सकते हैं।
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धान के नकली बीज के बड़े कारोबार के पीछे लगे इस रैकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अफसर जानकारी मिलने के बाद भी उन पर हाथ डालने की जुर्रत नहीं कर रहे। अब तक दामिनी के नाम पर यूपी के बाजार में उतारे गए करीब 30 हजार क्विंटल से अधिक धान के नकली बीज के गोरखधंधे का खुलासा होने के बाद बीज कंपनियों में हड़कंप मच गया है। जिला कृषि अधिकारी संजय सिंह ने पहले तो इस तरह का बीज बाजार में न होने की बात कही, फिर उनका कहना था कि वर्ष भर पहले मिली शिकायत के बाद पांच नमूने दामिनी के लिए गए थे, जो सही पाए गए।
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जिला कृषि अधिकारी ने कृषि निदेशालय के बीज एवं प्रक्षेत्र अनुभाग से दामिनी बीज बेचने के लिए एक कंपनी को जारी लाइसेंस का हवाला भी दिया। जबकि दामिनी ब्रांड के बीज 25 से अधिक कंपनियाें के धड़ल्ले से बाजार में उतारे जाने के सवाल पर वह मौन हो गए। उनका कहना था कि अगर ऐसा है तो वह गोपनीय जांच कराएंगे। सवाल उठता है कि अगर एक कंपनी को दामिनी धान बीज बेचने का लाइसेंस जारी हुआ है तो फिर कई कंपनियां उसी बीज की पैकिंग कर कैसे बाजार में धंधा चला रही हैं। इसका अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है।
जबकि पड़ोसी जिले इलाहाबाद के जिला कृषि अधिकारी ने नकली बीज की बिक्री को लेकर कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दामिनी बीज बेचने वाले व्यापारी और कंपनियों के खिलाफ बीज अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।
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वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ समेत प्रदेश के कई मंडलों में इस बीज कारोबार में 25 से अधिक कंपनियां शामिल हैं। इस बीज के बारे में अमर उजाला में हुए खुलासे के बाद भी प्रशासन और कृषि विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंगी। प्रशासन ने कारोबारियों को आज का एक दिन दे दिया, जब वे नकली बीज को ठिकाने लगा सकते हैं।
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धान के नकली बीज के बड़े कारोबार के पीछे लगे इस रैकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अफसर जानकारी मिलने के बाद भी उन पर हाथ डालने की जुर्रत नहीं कर रहे। अब तक दामिनी के नाम पर यूपी के बाजार में उतारे गए करीब 30 हजार क्विंटल से अधिक धान के नकली बीज के गोरखधंधे का खुलासा होने के बाद बीज कंपनियों में हड़कंप मच गया है। जिला कृषि अधिकारी संजय सिंह ने पहले तो इस तरह का बीज बाजार में न होने की बात कही, फिर उनका कहना था कि वर्ष भर पहले मिली शिकायत के बाद पांच नमूने दामिनी के लिए गए थे, जो सही पाए गए।
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जिला कृषि अधिकारी ने कृषि निदेशालय के बीज एवं प्रक्षेत्र अनुभाग से दामिनी बीज बेचने के लिए एक कंपनी को जारी लाइसेंस का हवाला भी दिया। जबकि दामिनी ब्रांड के बीज 25 से अधिक कंपनियाें के धड़ल्ले से बाजार में उतारे जाने के सवाल पर वह मौन हो गए। उनका कहना था कि अगर ऐसा है तो वह गोपनीय जांच कराएंगे। सवाल उठता है कि अगर एक कंपनी को दामिनी धान बीज बेचने का लाइसेंस जारी हुआ है तो फिर कई कंपनियां उसी बीज की पैकिंग कर कैसे बाजार में धंधा चला रही हैं। इसका अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है।
जबकि पड़ोसी जिले इलाहाबाद के जिला कृषि अधिकारी ने नकली बीज की बिक्री को लेकर कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दामिनी बीज बेचने वाले व्यापारी और कंपनियों के खिलाफ बीज अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।