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धार्मिक नगरी काशी की हर गली-नुक्कड़ पर है ‘स्वाद’

Fri, 21 Feb 2020 12:54 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी मनदीप श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
मनदीप श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 21 Feb 2020 12:54 AM IST
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The religious city of Kashi is famous for its special food
tamatar chaat - फोटो : instagram

काशी, बनारस या वाराणसी, मोक्ष की इस नगरी को किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है। आठों पहर जागने वाले इस शहर का अपना ही अनूठा मिजाज है। खान-पान की बात करें तो शहर अलग ही विशेषता रखता है।  काशी की सुबह कचौड़ी और जलेबी से होती है और देर रात तक लोग मलाई टोस्ट, मक्खन टोस्ट और चाय का आनंद उठाते रहते हैं। किसी भी मौसम में दोपहर से लेकर देर रात तक यहां दूध, मलाई, दही, रबड़ी, लस्सी, छेना, पनीर और कमतर मिलने वाले खुशबूदार बासुंदी (बसौंधी) का आनंद उठाया जा सकता है।

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हर गली, हर मोहल्ले, हर नुक्कड़ पर मिलने वाले चाट, पकौड़े, गोलगप्पे, टिकिया, टमाटर चाट की तो बात ही निराली है। बनारस की मिठाइयां विश्व में बेजोड़ हैं। गंगा के किनारे घाटों से लेकर पक्के महाल में मिलने वाली मिठाइयों में काजू पान, मेवा पान, मलाई पान, मलाई गिलोरी, मक्खन का समोसा, मक्खन की पूड़ी, छेने का पुलाव, खोये की जलेबी, छेने के खुरमा का स्वाद तो खाने वाले को भुलाए नहीं भूलता है।
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The religious city of Kashi is famous for its special food
कचौड़ी वाला - फोटो : Amar Ujala

इसी तरह देशी घी से बनने वाला लजीज मगदल, सोन पापड़ी, सोन हलुआ, घेवर, मालपुआ, मोती चूर का लड्डू, गुलाब जामुन, लौंगलता का जो स्वाद यहां मिलता है व अन्यत्र दुर्लभ है। काशी की तिरंगा बर्फी और जवाहर लड्डू का तो अपना अलग इतिहास ही है। आजादी के मतवालों के लिए यह मिठाई भर ही नहीं लड़ाई का मजबूत अस्त्र भी था। तब के दौर में देश का कोई राजा रजवाड़ा ऐसा नहीं था जहां ये मिठाई थोक में न मंगाई जाती रही हो।

आजाद भारत में भी यह दिल्ली के राजनेताओं में काफी लोकप्रिय रही। भोजन की बात करें तो यहां देश के सभी भागों के हर तरह के व्यंजन मिलते हैं। दक्षिण भारत के इडली दोसा उत्तपम से कढ़ी, पंजाबी पंचमेल दाल, हाथ की बनी मक्का, बाजरा, और गेहूं की रोटी भी यहां बड़े चाव से खायी जाती है। सब्जियों की वेरायटी की तो गिनती ही नहीं है।
 

The religious city of Kashi is famous for its special food
जलेबी मिठाई - फोटो : Social media

अनुभवी खानसामों के मसालों का जादू भिन्न-भिन्न तरीकों से पकाई गई सब्जियों में जो लज्जत जगाता है तो फिर खाने वाला वाह ! कहे बिना नहीं रहता है। भोजन के बाद मुख शुद्धि और पाचन के लिए खाया जाने वाला पान पूरे विश्व में बनारस की शान है। यहां पान को पकाने की कला कुछ खानदानियों के बीच ही है। पानों की शृंखला में सबसे ऊपर है मगही पान। यह मुंह में रखते ही गल जाता है।

अलग-अलग तंबाकू जर्दा में पगे पान के शौकीन तो बनारस से बाहर जाते समय भी पान यहीं से बंधवा कर ले जाते हैं। इसके अलाव मीठा पान, मेवे का पान, केसर और खस की खुशबू वाला पान, आयुर्वेदिक औषधियुक्त पान और उन्हें पेश करने का बनारसी अंदाज अनूठा है। यहां पनवाड़ी पान को सिंघाड़े की शक्ल देकर सोने और चांदी के वरक से सजाकर पेश करते हैं तो बीड़ा उठाने वाले की तबीयत फड़क उठती है।

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