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सदियों पुराना है वाराणसी और नेपाल का संबंध: राज्याभिषेक से पहले काशी में गंगा पूजन के लिए आते थे नेपाल के राजा
Fri, 19 Aug 2022 08:10 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Fri, 19 Aug 2022 08:10 AM IST
सार
काशी में नेपाली कोठी, काठ की हवेली और नेपाली मंदिर नेपाली संस्कृति के प्रतीक हैं। खासकर नेपाली मंदिर तो नेपाल और काशी निवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि नेपाल में राजशाही के दौरान राज्याभिषेक से पहले गंगा पूजन के लिए काशी आते थे।
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काशी-नेपाल का धार्मिक रिश्ता
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
काशी और नेपाल का धार्मिक संबंध सदियों से चला आ रहा है। काशी ने नेपाल को सनातन धर्म का ज्ञान दिया, अध्यात्म की रौशनी और संस्कृत का आधार भी दिया। काशी में नेपाली कोठी, काठ की हवेली और नेपाली मंदिर नेपाली संस्कृति के प्रतीक हैं। खासकर नेपाली मंदिर तो नेपाल और काशी निवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि नेपाल में राजशाही के दौरान राज्याभिषेक से पहले गंगा पूजन के लिए काशी आते थे। दशाश्वमेध घाट पर ही राजा-रानी गंगा स्नान कर गंगा पूजन करते थे। यह परंपरा नेपाल में सदियों से चली आ रही थी और जब तक राजशाही थी नेपाल के राजा राज्याभिषेक से पहले काशी आते रहे।
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि नेपाल में राजशाही के दौरान राज्याभिषेक से पहले गंगा पूजन के लिए काशी आते थे। दशाश्वमेध घाट पर ही राजा-रानी गंगा स्नान कर गंगा पूजन करते थे। यह परंपरा नेपाल में सदियों से चली आ रही थी और जब तक राजशाही थी नेपाल के राजा राज्याभिषेक से पहले काशी आते रहे।
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ललिता घाट पर बना पशुपति नाथ मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
महाराजा नेपाल ने काशी के विद्वान पं. राममूर्ति शुक्ला को काशीवास के लिए काठ की हवेली बनवाकर दान दी थी। चौखंभा में यह हवेली हुआ करती थी। नेपाल के पांच प्रसिद्ध विद्वान मोहन नेपाली, ऋषि नेपाली, गोकर्ण नेपाली,गोविंद और गोपाल नेपाली ने वैदिक कर्मकांड की शिक्षा काशी में ही ग्रहण की थी। राजा नेपाल 1983 में जब काशी आए तो वह गोपाल और ऋषि नेपाली को वैदिक पाठशाला के संचालन के लिए अपने साथ ले गए।
नेपाल के पशुपतिनाथ में कर्मकांड और पूजा-पाठ की जिम्मेदारी काशी से अध्ययन करने वाले पुजारियों के ही जिम्मे हैं। पूजा, प्रथा और परंपरा काशी के अनुसार ही वहां भी निभाई जाती है। वेद पाठ और ज्ञान के लिए आते हैं काशी नेपाली मंदिर केव्यवस्थापक रोहित का कहना है कि नेपाल के गांव से काशी में वेदपाठ की कामना से हर साल विद्यार्थी आते हैं। नेपाल से आकर काशी में वेदपाठ की कामना हर नेपाली परिवार में देखने को मिलती है।
नेपाल के पशुपतिनाथ में कर्मकांड और पूजा-पाठ की जिम्मेदारी काशी से अध्ययन करने वाले पुजारियों के ही जिम्मे हैं। पूजा, प्रथा और परंपरा काशी के अनुसार ही वहां भी निभाई जाती है। वेद पाठ और ज्ञान के लिए आते हैं काशी नेपाली मंदिर केव्यवस्थापक रोहित का कहना है कि नेपाल के गांव से काशी में वेदपाठ की कामना से हर साल विद्यार्थी आते हैं। नेपाल से आकर काशी में वेदपाठ की कामना हर नेपाली परिवार में देखने को मिलती है।
Kashi Vishwanath dham
- फोटो : अमर उजाला
काशी में करीब डेढ़ से दो हजार वेदपाठी और छात्र अध्ययन कर रहे हैं। तर्पण और मोक्ष का है केंद्र ललिता घाट पर स्थित नेपाली मंदिर नेपालियों केलिए तर्पण और आस्था का प्रमुख केंद्र है। पूर्वजों की मोक्ष की कामना से हर नेपाली परिवार नेपाली मंदिर आता है। गंगा स्नान, बाबा विश्वनाथ का दर्शन और संस्कार करने के लिए हर साल काफी संख्या में नेपाली आते रहते हैं।