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चांद की किरणों से खीर में बरसा अमृत, बांटा गया प्रसाद
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शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत बनकर धरती पर आईं। शहर में जगह-जगह शरद पूर्णिमा की रस्म निभाते हुए लोगों ने खीर बनाई और चंद्रमा की रोशनी में उसे रखा। मध्य रात्रि के बाद प्रसाद स्वरूप इसका वितरण किया गया।
मंगलवार को पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों को अमृत स्वरूप प्रदान किया। शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर चांदनी रात में रखने की परंपरा लंबे समय से चल रही है। ऐसा माना जाता है ऐसा करने से खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक खीर रखने की परंपरा निभाई गई। वहीं, दूसरी तरफ राष्ट्र सेविका समिति के तत्वावधान में संकट मोचन स्थित साकेत नगर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ व खीर वितरण का आयोजन किया गया। सेविकाओं ने सर्वप्रथम भारत माता व समिति की संस्थापिका वंदनीया लक्ष्मी बाई केलकर के चित्र पर माल्यार्पण किया। गाय के दूध से बनी खीर सेविका बहनों ने आसपास के परिवारों में भी वितरित किया।
चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती हैं किरणें
समिति की विभाग संपर्क प्रमुख डॉ. पद्मजा मेहता ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण चंद्रमा की सभी सोलह कलाओं से युक्त थे, इस पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती है। नवविवाहिता महिलाओं द्वारा किए जाने वाले पूर्णिमा व्रत की शुरुआत शरद पूर्णिमा के त्योहार से होती हैं। भारतीय संस्कृति में शरद पूर्णिमा में खीर बनाना और उसका वितरण करना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आयोजन में श्लोक नीता, गीत सोनाली ने किया। कार्यक्रम का संयोजन शालिनी और सोनाली ने किया।
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मंगलवार को पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों को अमृत स्वरूप प्रदान किया। शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर चांदनी रात में रखने की परंपरा लंबे समय से चल रही है। ऐसा माना जाता है ऐसा करने से खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक खीर रखने की परंपरा निभाई गई। वहीं, दूसरी तरफ राष्ट्र सेविका समिति के तत्वावधान में संकट मोचन स्थित साकेत नगर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ व खीर वितरण का आयोजन किया गया। सेविकाओं ने सर्वप्रथम भारत माता व समिति की संस्थापिका वंदनीया लक्ष्मी बाई केलकर के चित्र पर माल्यार्पण किया। गाय के दूध से बनी खीर सेविका बहनों ने आसपास के परिवारों में भी वितरित किया।
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चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती हैं किरणें
समिति की विभाग संपर्क प्रमुख डॉ. पद्मजा मेहता ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण चंद्रमा की सभी सोलह कलाओं से युक्त थे, इस पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें चमत्कारिक गुणों से परिपूर्ण होती है। नवविवाहिता महिलाओं द्वारा किए जाने वाले पूर्णिमा व्रत की शुरुआत शरद पूर्णिमा के त्योहार से होती हैं। भारतीय संस्कृति में शरद पूर्णिमा में खीर बनाना और उसका वितरण करना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आयोजन में श्लोक नीता, गीत सोनाली ने किया। कार्यक्रम का संयोजन शालिनी और सोनाली ने किया।
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