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शिव धाम के पुण्य पथ पर नंगे पांव निकले आस्थावान

Sun, 19 Dec 2021 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 12:51 AM IST
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The faithful came out barefoot on the holy path of Shiv Dham
कण-कण शंकर की नगरी काशी की अंतरगृही परिक्रमा का पथ आस्थावानों से जागृत हो उठा। ठंड के बावजूद आस्था के पुण्यपथ पर नंगे पांव ही श्रद्धालुओं का रेला निकला तो जन-जन की श्रद्धा के धागे एक दूसरे से जुड़ते चले गए। मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की पूर्णिमा का मान होने पर भगवान शिव से आज्ञा लेकर श्रद्धालु 25 किलोमीटर के पुण्यपथ पर ऊं नम: शिवाय का जप करते हुए निकल पड़े।
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शनिवार को भोर में मणिकर्णिका तीर्थ पर स्नान के बाद अंतरगृही परिक्रमा यात्रा के श्रद्धालुओं का रेला जल लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचा। ज्ञानवापी व्यास पीठ पर जल अर्पित करने के बाद श्रद्धालु पुण्य परिक्रमा मार्ग पर रवाना हुए। सिर पर गठरी लिए हुए श्रद्धालु माता सीता का ध्यान करते हुए घाटों के किनारे-किनारे होते हुए मणिकर्णिका घाट से अस्सी घाट, जगन्नाथ मंदिर, संकटमोचन, साकेत नगर, खोजवां, लहरतारा, मंडुवाडीह, होते हुए कैंटोंमेंट पहुंचेे। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करेंगे।
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चौकाघाट में रात्रि विश्राम के बाद रविवार की सुबह आदिकेशव घाट पर गंगा-वरुणा के संगम में डुबकी लगाकर श्रद्धालु बाटी-चोखा का भोग लगाएंगे। इसके बाद घाटों के सहारे रविवार को वापस मणिकर्णिका घाट तीर्थ पर स्नान के बाद व्यास पीठ पर संकल्प छोड़कर यात्रा को पूर्ण करेंगे। श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि त्रेतायुग में माता सीता ने अंतरगृही यात्रा की शुरूआत की थी। अंतरगृही यात्रा करने से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यात्रा की शुरुआत भी माता सीता का ध्यान करके की जाती है।
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होगा रात्रि विश्राम, दगेंगे अहरे
अंतरगृही यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने शनिवार की रात चौकाघाट में विश्राम किया। विश्राम के दौरान उपलों के अहरे दगे और बाटी-चोखा का भोग लगा। व्यासपीठ के आचार्य जितेंद्र नाथ व्यास ने बताया कि इस यात्रा को प्रदक्षिणा यात्रा भी कहा जाता है। नंगे पांव चलने से व्यक्ति वर्ष भर निरोग रहता है। इस यात्रा से सभी कष्ट दूर होते हैं और कुछ भक्त मौन यात्रा भी करते हैं। अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अंतरगृही यात्रा के साथ पिशाचमोचन स्थित कर्पदीश्वर महादेव के दर्शन का भी विधान है।
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