एमएलसी चुनाव: वाराणसी में कायम रहा धौरहरा परिवार का वर्चस्व, बाहुबली बृजेश की पत्नी ने जीती एकतरफा जंग
एमएलसी चुनाव में वाराणसी में भाजपा और सपा अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई। पंचायत चुनाव में मिली बड़ी जीत का लाभ भाजपा को एमएलसी चुनाव में नहीं मिल पाया है। बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी व पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने वाराणसी परिक्षेत्र के निर्वाचन में बड़ी जीत से अपने परिवार का वर्चस्व कायम रखा है।
विस्तार
एमएलसी चुनाव में वाराणसी में एक बार फिर धौरहरा परिवार ने 24 साल का अपना वर्चस्व कायम रखते हुए अन्नपूर्णा सिंह को एक तरफा जीत दर्ज कराई। चुनावी जंग में भाजपा और सपा अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई। पंचायत चुनाव में मिली बड़ी जीत का लाभ भाजपा को एमएलसी चुनाव में नहीं मिल पाया है। यहां तक की भाजपा अपने ही जनप्रतिनिधियों का वोट नहीं संभाल पाई है। यही कारण रहा कि एक तरफा मुकाबले में भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंची और सपा ने भाजपा प्रत्याशी से दोगुना से ज्यादा मत हासिल किया है।
दरअसल, सेंट्रल जेल में बंद बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी व पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने वाराणसी परिक्षेत्र के निर्वाचन में बड़ी जीत से अपने परिवार का वर्चस्व कायम रखा है। कुल 4723 मतों में अन्नपूर्णा सिंह ने करीब 85 फीसदी से ज्यादा 4234 मत हासिल किया।
भाजपा प्रत्याशी ने पार्टी नेताओं पर लगाया था आरोप
वाराणसी में नगर निगम के करीब 60 से ज्यादा पार्षद, एक दर्जन विधायक व एमएलसी और आठों ब्लाक में प्रमुख और करीब एक हजार सदस्य होने के बाद भी वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी सैकड़े तक नहीं पहुंच पाए। इससे उलट सपा प्रत्याशी उमेश यादव ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और भाजपा को पछाड़कर दोगुना से ज्यादा मत हासिल किया।
चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी ने अपनी पार्टी के पदाधिकारियों पर जेल में बंद बृजेश सिंह के पक्ष में प्रचार करने का आरोप लगाया था और अंत तक वे पार्टी पदाधिकारियों की गतिविधियों से संतुष्ट नहीं हुए। बता दें कि 24 वर्ष से बनारस की इस सीट पर केंद्रीय जेल में बंद बृजेश सिंह या उनके परिवार का ही कब्जा रहा है।
निवर्तमान एमएलसी बृजेश सिंह के बड़े भाई उदयभान सिंह उर्फ चुलबुल सिंह एमएलसी सीट पर 1998 में एमएलसी बने। दो बार एमएलसी चुने गए और पंचायत चुनाव में उनका दबदबा जगजाहिर ही है। इसके बाद 2010 में बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बसपा के टिकट से इस सीट पर एमएलसी बनी। इसके बाद वर्ष 2016 में बृजेश सिंह मैदान में उतरे तो भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया और उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था।
भाजपा पदाधिकारियों पर गिर सकती है गाज
स्नातक व शिक्षक एमएलसी में करारी शिकस्त के बाद स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन में मिली हार को लेकर भाजपा के शीर्ष प्रबंधन बेहद नाराज है। हालांकि नवनिर्वाचित एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने अपनी भाजपा के प्रति आस्था जताकर भाजपा की चिंता जरूर कम की है। मगर, चुनाव में हुए भितरघात को लेकर स्थानीय पदाधिकारियों की भूमिका चिन्हित की जा रही है।
माफिया के साथ पार्टी की फ्रेंडली फाइट, दुश्मन बना सुदामा
चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुके भाजपा प्रत्याशी डा. सुदामा पटेल का दर्द मंगलवार को झलक गया। उन्होंने कहा, माफिया बृजेश सिंह के साथ भाजपा ने फ्रेंडली फाइट की और केवल सुदामा ही अकेले दुश्मन बना है। वाराणसी में 10 एजेंट में पांच भाजपा के पदाधिकारी थे। उन्होंने कहा, पार्टी के पदाधिकारियों ने चुनाव में किसी तरह की मदद नहीं की।
चुनाव प्रबंधन से लेकर एक एक रुपये का खर्च तक मैंने अपने खाते से किया। सुदामा ने भरे गले से कहा कि पार्टी का आदेश था और मैंने पूरी ईमानदारी से चुनाव लड़ा, मगर पार्टी के लोगों ने मेरा साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा यह दिल्ली तक के पदाधिकारी जानते हैं कि मैंने पूरी निष्ठा से चुनाव लड़ा। अब इस हार का क्या ईनाम मुझे मिलेगा, यह शीर्ष प्रबंधन ही जाने।
वाराणसी की विकास यात्रा में योगदान से गौरवान्वित
नवनिर्वाचित एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने प्रमाण पत्र लेने के बाद कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने वाराणसी में अभूतपूर्व विकास कार्य किए। इस विकास यात्रा में अपने योगदान को लेकर गौरवान्वित हैं। उन्होंने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा, जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया। मेरी जीत जनता का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा, मेरे ज्येष्ठ स्वर्गीय उदयभान सिंह जनसंघ के समय से ही भाजपा के साथ रहे और हम उन्हीं के आदर्शों को आत्मसात करते हुए सुचिता की राजनीति में विश्वास करते हैं।