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वाराणसी जोन के 10 जिलों में चुनाव के लिए चुनौती बनेंगे इनामी अपराधी

Tue, 10 Jan 2017 05:13 PM IST
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 10 Jan 2017 05:13 PM IST
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 The challenge will be for election in 10 districts of Varanasi zone  by rewarded criminals
10 जिलों में 32 अपराधियों पर दस हजार और इससे अधिक इनाम
विधानसभा चुनाव सकुशल कराने के लिए गांव और क्षेत्र में शांतिभंग की आशंका वालों की सूची तैयार कर उन्हें पाबंद करने वाली पुलिस बड़े बदमाशों पर हाथ नहीं डाल पाई है।
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वाराणसी जोन के 10 जिलों में 32 खूंखार अपराधी पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। इन पर 10 हजार और इससे अधिक का इनाम है। हालांकि चुनाव आयोग की सख्ती के बाद पुलिस नए सिरे से इनकी घेरेबंदी के लिए मुंबई से बिहार और नेपाल तक फैले इनके नेटवर्क को खंगाल रही है।
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सबसे ज्यादा दो लाख का इनाम विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी रहे गाजीपुर के मुहम्मदाबाद क्षेत्र के अताउर्रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर पर है। अताउर्रहमान दो दशक से जरायम की दुनिया में है।
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गाजीपुर के ही मुहम्मदाबाद का शार्प शूटर शहाबुद्दीन भी दो लाख का इनामी है। बलिया के हल्दी क्षेत्र के चैनछपरा के कौशल कुमार चौबे पर भी दो लाख का इनाम है। कौशल की तलाश पुलिस को एक दशक से ज्यादा समय से है। 

50 हजार के इनामी बदमाशों में वाराणसी कोतवाली थाना के कपिलेश्वर गली का विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली, जंसा थाना के दीनदासपुर का मनीष सिंह, एमएलसी बृजेश सिंह का धुर विरोधी चौबेपुर के धरहरा का इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी, चोलापुर के गोसाईपुर का सुनील यादव, चौबेपुर के धन्नीपुर पचरावां का अजीम अहमद, लखनऊ के आलमबाग के गढ़ी कनौरा हरचंदपुर का सलीम उर्फ मुख्तार शेख और भदोही के गोपीगंज के बर्जीकला का पिंटू उर्फ रुद्रेश उपाध्याय अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

लंबे समय से पुलिस इन्हें तलाश रही है। वारदातों के बाद जब-तब इनकी भूमिका भी सामने आती है।
पूर्वांचल के फरार बदमाशों के तार नेपाल से पाकिस्तान तक जुड़े हैं।
शहाबुद्दीन के बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान जाकर दाऊद गैंग तक के लिए काम करने की सूचना पुलिस को है।
बताया जाता है कि अब वह देश में ही रहकर अपनी गैंग चलाता है।
विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में नाम आने के बाद से विश्वास नेपाली नेपाल में ही छिपा है। कई बार एसटीएफ नेपाल भी गई मगर उसे दबोचा नहीं जा सका।
माफिया से माननीय बने पूर्वांचल के एक नेता का करीबी सुनील यादव भी बाहर रहकर गैंग चला रहा है तो मनीष सिंह ने मायानगरी मुंबई को अपना ठिकाना ही बना लिया है।
 
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