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वाराणसी: सीवर से 18 घंटे बाद निकाला गया मजदूर का शव, आक्रोशित साथियों ने ठप किया काम, दस लाख के मुआवजे का एलान

Wed, 01 Dec 2021 12:11 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 01 Dec 2021 12:11 AM IST
सार

महाप्रबंधक ने बताया कि ओल्ड ट्रंक सीवर-रिलीविंग ट्रंक सीवर प्रोजेक्ट के तहत चौकाघाट पंपिंग स्टेशन तक सीवर को डायवर्ट किया जाना है। 31 दिसंबर तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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The body of the laborer was removed from the sewer after 18 hours in varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में लहुराबीर स्थित दस फीट गहरे सीवर लाइन में फंसे मजदूर नवाब आरिफ (20) का शव 18 घंटे बाद मंगलवार सुबह छह बजे बाहर निकाला गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद मालदा से आए परिजन एंबुलेंस से शव लेकर रवाना हुए। हादसे में मृत नवाब के परिजनों को जलनिगम की ओर से दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।

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वहीं लापरवाही से साथी की गई जान से आक्रोशित मजदूरों ने काम ठप कर दिया। हादसे के मामले में जलनिगम के जीएम ने जांच के लिए एक टीम गठित की है। सोमवार दोपहर 12 बजे सीवर लाइन में नवाब काम करने उतरा था। शाही नाला डायवर्जन कार्य के दौरान मलजल को रोकने के लिए शुक्रवार को लहुराबीर चौराहे पर लोहे की प्लेटें पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी नवाब आरिफ लगाई थी।
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इसके बाद भी सीवर फ्लो करने लगा तो कार्यदायी संस्था ने सोमवार दोपहर फिर से लोहे की प्लेटें चेक करने के लिए नवाब सहित तीन अन्य मजदूरों को काम पर लगाया। दोपहर लगभग बारह बजे नवाब मैनहोल के अंदर रस्सी के सहारे घुसा और लगभग आधे घंटे बाद उसकी कोई हरकत समझ में नहीं आने पर साथी घबरा गए। रस्सी खींची गई तो नवाब बाहर नहीं निकला।
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इसके बाद घबराए साथियों ने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार को सूचना दी। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की रात भर चले रेस्क्यू के बाद सुबह छह बजे उसका शव बाहर निकाला जा सका। चेतगंज थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया। नवाब के पिता और अन्य परिजन रोते-बिलखते हुए एंबुलेंस के जरिए नवाब का शव लेकर मालदा को रवाना हुए।

31 दिसंबर तक कार्य पूरा होने का लक्ष्य

घटना के बाद साथी मजदूरों ने गुस्से में काम बंद रखा। जल निगम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक फणिंद्र राय ने बताया कि घटना की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। टीम यह पता लगाएगी कि लापरवाही कहां हुई, संस्था के पास सुरक्षा व संरक्षा से जुड़े संसाधन थे या नहीं, सीवर फ्लो हो रहा था तो फिर क्यों उसे सीवर लाइन में उतारा गया आदि बिंदुओं पर जांच होगी।

वहीं आर्थिक सहायता के तौर पर मजदूर के परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। महाप्रबंधक ने बताया कि ओल्ड ट्रंक सीवर-रिलीविंग ट्रंक सीवर प्रोजेक्ट के तहत चौकाघाट पंपिंग स्टेशन तक सीवर को डायवर्ट किया जाना है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद खिड़किया घाट पर शाही नाला से सीवर 40-45 एमएलडी गंगा में नहीं गिरेगा। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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