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गंगा में प्रवाहित हुईं रावण की अस्थियां: जयपुर के व्यापारी क्यों निभाते हैं 13 साल की परंपरा,कैसी हुई शुरुआत
Sun, 09 Oct 2022 12:13 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Sun, 09 Oct 2022 12:13 PM IST
सार
समाज में बुराइयों को खत्म करने, सुख और शांति लाने के उद्देश्य से सेक्टर-8 व्यापार मंडल की ओर से पिछले 13 साल से रावण का अंतिम क्रियाकर्म विधि-विधान से किया जा रहा है। इसकी शुरुआत जयपुर से हुई थी।
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गंगा में प्रवाहित हुईं रावण की अस्थियां
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मोक्षदायिनी गंगा में लंकापति रावण की अस्थियों को विसर्जित करने के साथ ही मोक्ष की कामना की गई। जयपुर के प्रतापनगर दशहरा मेला समिति और सेक्टर-8 व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने विधि विधान से राजेंद्र प्रसाद घाट पर अस्थि विसर्जन की रस्म अदा की। 13 साल से रावण के पुतला दहन के बाद अस्थियों को विसर्जित करने का यह सिलसिला चल रहा है।
शनिवार को जयपुर से सेक्टर-8 व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र पटेल के नेतृत्व में नौ पदाधिकारियों का दल काशी पहुंचा। रावण की अस्थियों के रूप में रावण दहन की राख लेकर सभी राजेंद्र प्रसाद घाट पर पहुंचे। तीर्थ पुरोहित द्वारा विधि-विधान से पूजन कराने के बाद उन्होंने अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया। संगठन की ओर से रावण के पुतला दहन के बाद मृत्यु के बाद होने वाले सभी संस्कार किए जाते हैं। अध्यक्ष राजेंद्र पटेल ने बताया कि पांच अक्तूबर को रावण दहन हुआ। इसके बाद तीये की बैठक सात अक्तूबर को हुई, वाराणसी में अस्थि विसर्जन के बाद 16 अक्तूबर को शीशी पूजन, पगड़ी रस्म और ब्रह्म भोज का आयोजन होगा।
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शनिवार को जयपुर से सेक्टर-8 व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र पटेल के नेतृत्व में नौ पदाधिकारियों का दल काशी पहुंचा। रावण की अस्थियों के रूप में रावण दहन की राख लेकर सभी राजेंद्र प्रसाद घाट पर पहुंचे। तीर्थ पुरोहित द्वारा विधि-विधान से पूजन कराने के बाद उन्होंने अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया। संगठन की ओर से रावण के पुतला दहन के बाद मृत्यु के बाद होने वाले सभी संस्कार किए जाते हैं। अध्यक्ष राजेंद्र पटेल ने बताया कि पांच अक्तूबर को रावण दहन हुआ। इसके बाद तीये की बैठक सात अक्तूबर को हुई, वाराणसी में अस्थि विसर्जन के बाद 16 अक्तूबर को शीशी पूजन, पगड़ी रस्म और ब्रह्म भोज का आयोजन होगा।
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जयपुर के व्यापारियों ने निभाई 13 साल की परंपरा
- फोटो : अमर उजाला
समाज के रावण को मिले मुक्ति
राजेंद्र पटेल ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने बुजुर्गों का हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार करते हैं। साथ ही, घर का शुद्धिकरण करते हैं, ठीक उसी प्रकार रावण का क्रियाकर्म किया जा रहा है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य है कि लोग अपने अंदर के रावण को खत्म कर अच्छाई का रास्ता अपनाएं।
राजेंद्र पटेल ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने बुजुर्गों का हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार करते हैं। साथ ही, घर का शुद्धिकरण करते हैं, ठीक उसी प्रकार रावण का क्रियाकर्म किया जा रहा है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य है कि लोग अपने अंदर के रावण को खत्म कर अच्छाई का रास्ता अपनाएं।
13 साल पहले जयपुर में हुई थी शुरुआत
समाज में बुराइयों को खत्म करने, सुख और शांति लाने के उद्देश्य से सेक्टर-8 व्यापार मंडल की ओर से पिछले 13 साल से रावण का अंतिम क्रियाकर्म विधि-विधान से किया जा रहा है। इसकी शुरुआत जयपुर से हुई थी। इसके बाद त्रिवेणी, पुष्कर और हरिद्वार में अस्थियों का विसर्जन किया जा चुका है। रावण को तो जला दिया जाता है, लेकिन उसका अंतिम संस्कार नहीं होता है, यही कारण है कि देश में घर-घर रावण रूपी अपराध हो रहे हैं। इसी को खत्म करने के उद्देश्य से हम लोगों ने रावण दहन के बाद अंतिम क्रियाकर्म को करने का निर्णय लिया था। इसमें रावण के ससुराल मंदौर (जोधपुर) से भी लोग पगड़ी की रस्म में शामिल होते हैं।
समाज में बुराइयों को खत्म करने, सुख और शांति लाने के उद्देश्य से सेक्टर-8 व्यापार मंडल की ओर से पिछले 13 साल से रावण का अंतिम क्रियाकर्म विधि-विधान से किया जा रहा है। इसकी शुरुआत जयपुर से हुई थी। इसके बाद त्रिवेणी, पुष्कर और हरिद्वार में अस्थियों का विसर्जन किया जा चुका है। रावण को तो जला दिया जाता है, लेकिन उसका अंतिम संस्कार नहीं होता है, यही कारण है कि देश में घर-घर रावण रूपी अपराध हो रहे हैं। इसी को खत्म करने के उद्देश्य से हम लोगों ने रावण दहन के बाद अंतिम क्रियाकर्म को करने का निर्णय लिया था। इसमें रावण के ससुराल मंदौर (जोधपुर) से भी लोग पगड़ी की रस्म में शामिल होते हैं।