{"_id":"bd5c121bc140e5231c8ecf8f4612835d","slug":"the-admirer-of-the-work-of-kashi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काशी की कारीगरी के हुए मुरीद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी की कारीगरी के हुए मुरीद
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Thu, 17 Dec 2015 01:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की बागडोर संभालने के बाद भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को एक नई गति मिली है। यही वजह है कि दो साल में अमेरिकी राजनयिकों की आमदरफ्त बढ़ी है।
इसी कड़ी में भारत में अमेरिका के कार्यकारी राजदूत रिचर्ड राहुल वर्मा बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। सबसे पहले वे दिन में करीब 11:45 बजे चांदपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट स्थित कृत्रिम मोती उत्पादन की इकाई देखने बनारस बीड्स के वर्कशाप पहुंचे। यहां वे बनारस के हस्तशिल्प से भी रूबरू हुए। राजदूत वर्मा ने कांच से बनने वाले मोतियों के उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी भी हासिल की।
अमेरिकी राजदूत ने बनारस बीड्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक गुप्ता व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता और निदेशक शालिनी चंद्रा समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों से बात भी की। उन्होंने बताया कि वाराणसी के हस्तशिल्प और हस्तकलाओं में उन्हें काफ ी रुचि है।
विज्ञापन
अमेरिकी राजदूत के भ्रमण के बाद अशोक गुप्ता ने बताया कि वाराणसी को हेरिटेज सिटी के रूप में विश्व पटल पर लाने के प्रयास के कारण वाराणसी के प्रति पूरी दुनिया की रुचि बढ़ गई है। दुनिया के विकसित देशों का काशी एवं पूर्वांचल की आर्थिक गतिविधियों में ध्यान बढ़ा है। खासतौर पर निर्यात में अग्रणी कंपनियों के साथ वाणिज्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए विदेशी दूतावास काफ ी सक्रिय हो गए हैं। सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि उनकी कंपनी का 70 फीसदी कारोबार अमेरिका से होता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका में हस्तशिल्प, हथकरघा और हस्तनिर्मित उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी नहीं है। अमेरिका के बाद यूरोपीय देशों ने भी इनसे कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी।
अशोक गुप्ता ने बताया कि भारतीय रेशम निर्मित उत्पाद हों या हस्तशिल्प, हथकरघा के उत्पाद, अमेरिका इनका बड़ा आयातक देश है। अमेरिकी राजदूत के आने से भविष्य में कारोबार में विस्तार की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।
विज्ञापन
इसी कड़ी में भारत में अमेरिका के कार्यकारी राजदूत रिचर्ड राहुल वर्मा बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। सबसे पहले वे दिन में करीब 11:45 बजे चांदपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट स्थित कृत्रिम मोती उत्पादन की इकाई देखने बनारस बीड्स के वर्कशाप पहुंचे। यहां वे बनारस के हस्तशिल्प से भी रूबरू हुए। राजदूत वर्मा ने कांच से बनने वाले मोतियों के उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी भी हासिल की।
विज्ञापन
अमेरिकी राजदूत ने बनारस बीड्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक गुप्ता व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता और निदेशक शालिनी चंद्रा समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों से बात भी की। उन्होंने बताया कि वाराणसी के हस्तशिल्प और हस्तकलाओं में उन्हें काफ ी रुचि है।
विज्ञापन
अमेरिकी राजदूत के भ्रमण के बाद अशोक गुप्ता ने बताया कि वाराणसी को हेरिटेज सिटी के रूप में विश्व पटल पर लाने के प्रयास के कारण वाराणसी के प्रति पूरी दुनिया की रुचि बढ़ गई है। दुनिया के विकसित देशों का काशी एवं पूर्वांचल की आर्थिक गतिविधियों में ध्यान बढ़ा है। खासतौर पर निर्यात में अग्रणी कंपनियों के साथ वाणिज्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए विदेशी दूतावास काफ ी सक्रिय हो गए हैं। सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि उनकी कंपनी का 70 फीसदी कारोबार अमेरिका से होता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका में हस्तशिल्प, हथकरघा और हस्तनिर्मित उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी नहीं है। अमेरिका के बाद यूरोपीय देशों ने भी इनसे कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी।
अशोक गुप्ता ने बताया कि भारतीय रेशम निर्मित उत्पाद हों या हस्तशिल्प, हथकरघा के उत्पाद, अमेरिका इनका बड़ा आयातक देश है। अमेरिकी राजदूत के आने से भविष्य में कारोबार में विस्तार की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।