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Teachers Day: कौन थे यूपी के चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र व रामभद्राचार्य के गुरू, पढ़ें गुरू-शिष्य की कहानी

Tue, 05 Sep 2023 01:20 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 05 Sep 2023 01:20 PM IST
सार

प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को गणित विषय पढ़ाने वाले शिक्षक हरिहर शुक्ल का कहते हैं कि दुर्गाशंकर में विलक्षण प्रतिभा है। उनकों दस पैसे इनाम भी दिया था। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर आसीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र सन् 1971 में बलिया के लक्ष्मी राज देवी इंटर कॉलेज में कक्षा आठ में पढ़ने आए थे।

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Teachers' Day: Some became the Chief Secretary of the state and some memorized the Bhagavad Gita
Teachers' Day: कोई बना प्रदेश का चीफ सेक्रेटरी तो किसी ने कंठस्थ याद की भगवद गीता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुछ खास है कि काशी में कुदरत ने इतने कुलिश (हीरा) पैदा किए हैं कि गिनती नामुमकिन है। ये देश की सांस्कृतिक राजधानी में संस्कृति और कला की ऐसी हस्तियां हैं, जिन्होंने सफलता के सभी पैमानों को अपनी हुनर से बेहिसाब कर दिया है। साहित्य के पितामह काशीनाथ सिंह और सुरों के खुदा छन्नूलाल मिश्र के जरिये सीखने-सिखाने की पूरी बात…। 87 साल की उम्र में भी देशभर के विश्वविद्यालयों से हिंदी के छात्र गुरुदीक्षा लेने आते हैं।

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डॉ. काशीनाथ सिंह, साहित्यकार

बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर और साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह कहते हैं, अच्छी शिक्षा एक बीज को बोने की तरह है। अध्यापक जीवन से सेवानिवृत्ति के 30 साल बाद भी काशी नाथ सिंह शिक्षक की ही भूमिका में हैं। 87 साल की उम्र में भी देश भर के विश्वविद्यालयों से हिंदी के छात्र, रंगमंच के नाट्यकर्मी और छोटे-बड़े पर्दे के कलाकार गुरुदीक्षा लेने आते ही रहते हैं। स्वास्थ्य साथ नहीं देरा, इसके बावजूद वह किसी को निराश नहीं करते हैं। काशीनाथ सिंह के मुताबिक उनको अपने गुरु हजारी प्रसाद द्विवेदी से निर्भय होने की शिक्षा मिली थी। उन्होंने विद्यार्थियों को कभी विद्यार्थी नहीं समझा, हमेशा मित्र समझा।

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वे कहते हैं, अपने गुरु के संस्कार को ही मैंने अपने विद्यार्थियों में भी रोपा। यही कारण है कि कई छात्र आज सफलता के शिखर पर हैं। हम छात्रों को किताबों के माध्यम से जीवन जीना और संघर्ष करना सिखाते थे। शिक्षक और छात्र के बीच में किताबों के पन्ने नहीं होते, उन पन्नों में जिंदगी होती है। समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। शिक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जिसमें गुरु की ऊर्जा बेधड़क बच्चों तक पहुंच सके। हमने अपने गुरु से सीखा था कि असहमति विरोध नहीं होता, विचारों का द्वंद आगे बढ़ाता है। हमारा विकास असहमतियों से हुआ है।

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शिष्यों को बांटे संगीत के सप्तक

काशी के संगीत के सिरमौर और स्वरमंडल पर सुरों की जुगलबंदी से गायन का जादू जगाने वाले पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र की आवाज की खनक अब उनके शिष्यों में भी सुनाई देने लगी है। 87 साल की उम्र के बाद भी उनके अंदर का शिक्षक आज भी मुक्तकंठ से शिष्यों में संगीत के सप्तक बांट रहा है।

पं. छन्नूलाल मिश्र का कहना है कि उनको जो भी अपने गुरु से मिला, उन्होंने सबकुछ अपने शिष्यों को बांट दिया। कर्ता गुरु न कर्ता चेला...जिसने जैसी साधना की उसने संगीत को उस तरह से पाया। बेटी और शिष्या डॉ. नम्रता मिश्रा का कहना है कि पिताजी से ही मैंने परिश्रम, अनुशासन और गुरुभक्ति का ककहरा सीखा है। बतौर गुरु उन्होंने अपने शिष्यों और बेटे-बेटी में कोई अंतर नहीं रखा। पिताजी ने मेहनत करने के साथ ही अनुशासन का जो पाठ पढ़ाया उसे हमने जीवन में उतार लिया है।

Teachers' Day: Some became the Chief Secretary of the state and some memorized the Bhagavad Gita
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिक्षक पं. मुरलीधर - फोटो : अमर उजाला

…और धर्म और कर्म के दो योद्धा तैयार करने वाले शिक्षकों की कहानी

पहली कहानी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिक्षक पं. मुरलीधर की

 

गुरु की मदद से जगद्गुरु ने कंठस्थ की थी भगवद गीता: जगद्गुरु रामभद्राचार्य किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पद्म सम्मान से सम्मानित रामभद्राचार्य यूपी के जौनपुर के रहने वाले हैं। 73 वर्षीय जगद्गगुरु के गुरु हैं पं. मुरलीधर मिश्र। इन्हीं की मदद से पांच वर्ष की उम्र में मात्र 15 दिनों में सात सौ श्लोकों वाली संपूर्ण भगवद गीता रामभद्राचार्य जी ने कंठस्थ कर ली थी। करीब 100 वसंत देख चुके पं. मुरलीधर मिश्र उस समय की बात बताते-बताते कुछ-कुछ भूल जाते हैं। चेहरे पर अवस्था का प्रभाव साफ झलकता है। बहुत ज्यादा बोल तो नहीं पाते, लेकिन रामभद्राचार्य जी बचपन से ही कितने प्रतिभावान थे यह बताने के लिए उत्सुक रहते हैं। मुरलीधर मिश्र जौनपुर के सरायभोगी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक थे और उस समय जगद्गुरु राम भद्राचार्य वहां आते थे। पंडित जी को भगवद गीता का अच्छा ज्ञान था। वह स्कूल खत्म होने के बाद भी बच्चों को धार्मिक ज्ञान देते थे। स्वामी रामभद्राचार्य भी इनके घर गीता पढ़ने जाया करते थे। पं. मुरलीधर अपनी कांपती हुई जुबां से बताते हैं कि जो बातें या श्लोक एक बार पढ़ा दिया जाता था, उसको गिरधर यानी रामभद्राचार्य को दोबारा बताने की जरूरत नहीं पड़ती थी। पिछले वर्ष जब रामभद्राचार्य जी अपने गांव शचीपुरम आए थे, तो पं.मुरलीधर मिश्र से मिले भी थे।

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यूपी के चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र के शिक्षक हरिहर शुक्ल - फोटो : अमर उजाला

दूसरी कहानी उप्र के चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र के शिक्षक हरिहर शुक्ल की

चीफ सेक्रेटरी को अपने शिक्षक से मिला था दस पैसे का इनाम

प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को गणित विषय पढ़ाने वाले शिक्षक हरिहर शुक्ल का कहते हैं कि दुर्गाशंकर में विलक्षण प्रतिभा है। उनकों दस पैसे इनाम भी दिया था। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर आसीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र सन् 1971 में बलिया के लक्ष्मी राज देवी इंटर कॉलेज में कक्षा आठ में पढ़ने आए थे। हरिहर शुक्ल उन्हें गणित पढ़ाते थे। दुर्गाशंकर कक्षा में सवाल पूछने में सबसे आगे रहते थे। इतना ही नहीं प्रश्नों के उत्तर देने में भी वो ज्यादा समय नहीं लगाते थे।
शुक्ल कहते हैं, उनकी प्रतिभा का कायल होकर तब मैंने उन्हें दस पैसा (तब की धनराशि) बतौर पुरस्कार भी दिया था। शुक्ल बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान कभी उन्हें डॉटने-पीटने की नौबत नहीं आई। अस्सी वर्षीय हरिहर शुक्ल 1964 से वर्ष 2007 तक लक्ष्मीराज देवी इंटर कॉलेज में बतौर एलटी ग्रेड अध्यापक के तौर पर कार्यरत रहे। 2022 में बलिया बलिदान दिवस पर सीएम के साथ चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्रा भी दो दिवसीय दौरे पर आए थे। बीस अगस्त को लक्ष्मीराज देवी इंटर काॅलेज में उनका कार्यक्रम था। उन्होंने हरिहर शुक्ल समेत अपने छात्र जीवन के गुरुजनों से मुलाकात की थी। उन कक्षाओं को देखा था, जहां उन्होंने कक्षा आठ में पढ़ाई की थी।
 

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