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सोमवती अमावस्या: पितरों का होगा तर्पण, 8 अप्रैल को बन रहा है सोमवार और अमावस्या का ये खास संयोग
Thu, 04 Apr 2024 10:26 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 04 Apr 2024 10:26 PM IST
सार
Somvati Amavasya: पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की भी पूजा का विधान है। इस दिन पीपल की सात बार परिक्रमा की जाती है। अमावस्या की तिथि 8 अप्रैल को सुबह 3:21 मिनट पर शुरू होगी और समापन रात 11:50 मिनट पर होगा।
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सोमवती अमावस्या (सांकेतिक फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सोमवती अमावस्या पर पूजा, स्नान और दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही घर-परिवार से पितृ दोष का निवारण भी होता है। इस बार सोमवती अमावस्या पर सोमवार का भी संयोग बन रहा है। सोमवार का दिन होने के कारण पितरों के साथ ही भगवान शिव का पूजन भी शुभ फलदायी रहेगा। पितरों के तर्पण के साथ ही अखंड सौभाग्य का वरदान मिलेगा।
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हिंदू शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार अगर सोमवार के दिन अमावस्या पड़े तो इसे सुंदर संयोग माना जाता है। चैत्र माह में आठ अप्रैल के दिन सोमवती अमावस्या पड़ रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या की तिथि 8 अप्रैल को सुबह 3:21 मिनट पर शुरू होगी और समापन रात 11:50 मिनट पर होगा।
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सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और दान का शुभ मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:18 बजे तक है। इस दिन शिव पूजा का समय सुबह 9:13 से सुबह 10:48 तक है और पितरों के तर्पण का समय सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा।
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पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत
सोमवती अमावस्या व्रत को शास्त्रों में अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा जाता है। अश्वत्थ का अर्थ है पीपल का पेड़। पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की भी पूजा का विधान है। इस दिन पीपल की सात बार परिक्रमा की जाती है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र गंगा स्नान करने और दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मुख्य तौर पर यह व्रत सुहागिन महिलाएं रखतीं हैं। सोमवती अमावस्या का व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं।