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गोरखपुर सीरियल बम ब्लॉस्ट में आजमगढ़ के तारिक काजमी को उम्रकैद, गिरफ्तारी पर महीनों हुआ था आंदोलन

Mon, 21 Dec 2020 11:57 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर/आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर/आजमगढ़ Published by: विचित्र सिंह Updated Mon, 21 Dec 2020 11:57 PM IST
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Tariq Kazmi of Azamgarh sentenced to life in Gorakhpur Golghar serial bomb blast
court Order

गोरखपुर के गोलघर सीरियल बम ब्लॉस्ट मामले में आजमगढ़ के तारिक काजमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। जुर्म सिद्ध पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार सिंह ने आजमगढ़ के रानी की सहाय थाना क्षेत्र के ग्राम शंभूपुर निवासी अभियुक्त तारिक काजमी को सजा सुनाते हुए 2 लाख 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। 

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जानकारी के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राम प्रकाश सिंह एवं शरदेंदु प्रताप नारायण सिंह का कहना था  कि इस मामले मुकदमा कैंट थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर निवासी वादी राजेश राठौर ने एक जागरूक नागरिक होने के नाते दर्ज कराया था। उनका कहना था कि वह बलदेव प्लाजा पेट्रोल पंप के निकट सरस्वती एजेंसी में बतौर सेल्समैन का कार्य करता है। 22 मई 2007 को समय करीब 7 बजे वह बलदेव प्लाजा पर मौजूद थे।

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उसी समय जलकल बिल्डिंग की तरफ से एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी, जिससे भगदड़ मची हुई थी। इसी बीच दूसरा विस्फोट बलदेव प्लाजा पेट्रोल पंप के बगल में साइकिल में टंगे झोले में रखे हुए बम के कारण हुआ। अफरा-तफरी का माहौल था। धड़ाधड़ दुकानें बंद होने लगीं। लोग अभी कुछ समझ पाते कि तीसरा विस्फोट गणेश चौराहे पर हुआ। इसकी सूचना पाकर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और विस्फोट वाले स्थानों से भीड़ को हटाने लगी। दौरान विवेचना अभियुक्त तारिक काजमी का नाम प्रकाश में आया और विवेचक ने अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। साक्ष्यों के आधार पर सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया।

तारिक की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ में महीनों चला था आंदोलन


जनपद के रानी की सराय थाना क्षेत्र का रहने वाले तारिक काजमी को एसटीएफ ने दिसंबर 2007 में बाराबंकी रेलवे स्टेशन से जौनपुर जिला निवासी खालिद मुजाहिद के साथ गिरफ्तार किया था। उसके पास से भारी मात्रा में गोला, बारूद व असलहा भी बरामद हुआ था। तारिक की गिरफ्तारी के बाद जिले में महीनों आंदोलन चला था। जिस समय तारिक की गिरफ्तारी हुई, उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी। जिले में तारिक की गिरफ्तारी पर राजनीति शुरू हो गई। कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा किया कि तारिक को एसटीएफ ने रानी की सराय स्थित उसके दवाखाने से उठाया और फिर बाराबंकी से असलहों के साथ गिरफ्तारी दिखाई। 2013 में तत्कालीन सपा सरकार में तारिक से मुकदमा वापस लेने की भी तैयारी हुई, लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया। अब कोर्ट ने प्रदेश में हुए सीरियल बम धमाकों में तारिक को उम्रकैद की सजा सुना दी है तो जिला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

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