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Varanasi News: अगले सप्ताह से रोपवे पर काम शुरू करेगी स्विट्जरलैंड की टीम, दिसंबर शुरू हो जाएगा ट्रायल
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बनारस पहुंची टीम, 2.5 किलोमीटर तक रोप पुलिंग का करेंगे काम
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। रोपवे का ट्रायल दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। स्विट्जरलैंड की वाराणसी पहुंच गई हैं। अगले सप्ताह से टीम काम शुरू कर देगी। ट्रायल से पहले रोप पुलिंग का काम शुरू किया जाएगा। रोप पुलिंग का काम पूरा होने के बाद एक छोटे ड्रोन के माध्यम से पहले ट्रायल होगा।
उसके सफल होने के बाद गंडोला का ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन महीने तक गंडोला में दस व्यक्तियों के बराबर वजन रखकर लगातार ट्रायल होगा। रोपवे का काम कर रही एनएचएलएमएल (नेशनल हाईवे लाजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड) कार्यदायी संस्था के साथ अगले सप्ताह से स्विट्जरलैंड के विशेषज्ञों की टीम भी काम शुरू कर देगी। यह टीम तैयार किए टावरों पर अगले सप्ताह से रोप पुलिंग का काम शुरू करेगी। इसके बाद दिसंबर के पहले सप्ताह से गंडोला का ट्रायल भी शुरू कर दिया जाएगा। गंडोला के ट्रायल के दौरान उसमें दस व्यक्तियों के बराबर वजन रखकर ट्रायल किया जाएगा। यह ट्रायल लगभग तीन महीने तक चलेगा। उसके बाद ही इसके उद्घाटन को हरी झंडी इंजीनियरों की की ओर से दी जाएगी।
अगले सप्ताह से एक मिलीमीटर मोटी फाइबर रोप को छोटे ड्रोन की मदद से पुल किया जाएगा। एक मिलीमीटर फाइबर का काम पूरा होने के बाद अगले चरण में 12, 26 और 52 मिमी की रोप को पुल किया जाएगा। इस काम में करीब दो सप्ताह तक का समय लग सकता है। कारण, पहले यह काम दिन और रात दोनों समय होना था लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह काम सिर्फ दिन की रोशनी में ही हो सकता है। इसीलिए रोप को पुल करने का समय बढ़ गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर पूजा मिश्रा ने बताया कि स्विट्जरलैंड की टीम अगले सप्ताह से काम शुरू करेगी।
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रोपवे के हर स्टेशन पर मिलेंगी मेट्रो जैसी सुविधाएं
रोपवे के स्टेशन मेट्रो की तर्ज पर विकसित किए गए हैं। यहां एंट्री से लेकर टिकट लेने तक की सभी व्यवस्थाएं बिल्कुल वैसी ही दिखेंगी। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी यहां मिलेंगे। टिकट काउंटर को उसी तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा टिकट वेंडिंग मशीन भी रहेंगी, जहां से लोग खुद भी टिकट ले सकेंगे। कार्ड भी जारी किए जाएंगे ताकि बार-बार टिकट लेने के लिए लोग लाइन से बच सकेंगे। कार्ड का रिचार्ज कराकर उससे चल सकेंगे। स्टेशन में एंट्री के दौरान बैग चेकिंग की प्रक्रिया भी अन्य स्टेशनों की तरह ही रहेगी।
स्टेशन निर्माण में स्थानीय चीजों का इस्तेमाल
रोपवे के स्टेशन निर्माण में शासन के निर्देश पर स्थानीय चीजों का इस्तेमाल किया गया है। चुनार पत्थर से लेकर अन्य सभी सामग्री काशी के आसपास जिलों से या फिर उप्र से ही मंगाया गया है। वहीं अब इन स्टेशनों के अंदर दुकानें तैयार की जाएंगी। जिसमें एक जनपद एक उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें लकड़ी खिलौना, सिल्क साड़ी, पान, लंगड़ा आम और गुलाबी मीनाकारी जैसे उत्पाद यहां मिलेंगे। इसके अलावा फूड की दुकानें भी होंगी।
सुविधाएं विश्वस्तरीय, किराया ऑटो जितना
रोपवे का किराया कितना होगा यह अभी तय नहीं है। इस पर अभी मंथन चल रहा है। शासन के निर्देश के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा। दरअसल यह प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों में से एक है, तो माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देकर कम से कम किराया लिया जाएगा। ताकि काशी आने वाले लोगों पर रोपवे पर सफर करने का अधिक आर्थिक बोझ न पड़े। इसके लिए यह भी देखा जा रहा है कि कैंट स्टेशन से गिरजाघर या गोदौलिया तक जाने वाले टेंपो कितना किराया प्रति सवारी ले रहे हैं। उसके आसपास ही रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह तय है कि किराया ऑटो के किराए के आसपास ही रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। रोपवे का ट्रायल दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। स्विट्जरलैंड की वाराणसी पहुंच गई हैं। अगले सप्ताह से टीम काम शुरू कर देगी। ट्रायल से पहले रोप पुलिंग का काम शुरू किया जाएगा। रोप पुलिंग का काम पूरा होने के बाद एक छोटे ड्रोन के माध्यम से पहले ट्रायल होगा।
उसके सफल होने के बाद गंडोला का ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन महीने तक गंडोला में दस व्यक्तियों के बराबर वजन रखकर लगातार ट्रायल होगा। रोपवे का काम कर रही एनएचएलएमएल (नेशनल हाईवे लाजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड) कार्यदायी संस्था के साथ अगले सप्ताह से स्विट्जरलैंड के विशेषज्ञों की टीम भी काम शुरू कर देगी। यह टीम तैयार किए टावरों पर अगले सप्ताह से रोप पुलिंग का काम शुरू करेगी। इसके बाद दिसंबर के पहले सप्ताह से गंडोला का ट्रायल भी शुरू कर दिया जाएगा। गंडोला के ट्रायल के दौरान उसमें दस व्यक्तियों के बराबर वजन रखकर ट्रायल किया जाएगा। यह ट्रायल लगभग तीन महीने तक चलेगा। उसके बाद ही इसके उद्घाटन को हरी झंडी इंजीनियरों की की ओर से दी जाएगी।
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अगले सप्ताह से एक मिलीमीटर मोटी फाइबर रोप को छोटे ड्रोन की मदद से पुल किया जाएगा। एक मिलीमीटर फाइबर का काम पूरा होने के बाद अगले चरण में 12, 26 और 52 मिमी की रोप को पुल किया जाएगा। इस काम में करीब दो सप्ताह तक का समय लग सकता है। कारण, पहले यह काम दिन और रात दोनों समय होना था लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह काम सिर्फ दिन की रोशनी में ही हो सकता है। इसीलिए रोप को पुल करने का समय बढ़ गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर पूजा मिश्रा ने बताया कि स्विट्जरलैंड की टीम अगले सप्ताह से काम शुरू करेगी।
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रोपवे के हर स्टेशन पर मिलेंगी मेट्रो जैसी सुविधाएं
रोपवे के स्टेशन मेट्रो की तर्ज पर विकसित किए गए हैं। यहां एंट्री से लेकर टिकट लेने तक की सभी व्यवस्थाएं बिल्कुल वैसी ही दिखेंगी। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी यहां मिलेंगे। टिकट काउंटर को उसी तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा टिकट वेंडिंग मशीन भी रहेंगी, जहां से लोग खुद भी टिकट ले सकेंगे। कार्ड भी जारी किए जाएंगे ताकि बार-बार टिकट लेने के लिए लोग लाइन से बच सकेंगे। कार्ड का रिचार्ज कराकर उससे चल सकेंगे। स्टेशन में एंट्री के दौरान बैग चेकिंग की प्रक्रिया भी अन्य स्टेशनों की तरह ही रहेगी।
स्टेशन निर्माण में स्थानीय चीजों का इस्तेमाल
रोपवे के स्टेशन निर्माण में शासन के निर्देश पर स्थानीय चीजों का इस्तेमाल किया गया है। चुनार पत्थर से लेकर अन्य सभी सामग्री काशी के आसपास जिलों से या फिर उप्र से ही मंगाया गया है। वहीं अब इन स्टेशनों के अंदर दुकानें तैयार की जाएंगी। जिसमें एक जनपद एक उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें लकड़ी खिलौना, सिल्क साड़ी, पान, लंगड़ा आम और गुलाबी मीनाकारी जैसे उत्पाद यहां मिलेंगे। इसके अलावा फूड की दुकानें भी होंगी।
सुविधाएं विश्वस्तरीय, किराया ऑटो जितना
रोपवे का किराया कितना होगा यह अभी तय नहीं है। इस पर अभी मंथन चल रहा है। शासन के निर्देश के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा। दरअसल यह प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों में से एक है, तो माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देकर कम से कम किराया लिया जाएगा। ताकि काशी आने वाले लोगों पर रोपवे पर सफर करने का अधिक आर्थिक बोझ न पड़े। इसके लिए यह भी देखा जा रहा है कि कैंट स्टेशन से गिरजाघर या गोदौलिया तक जाने वाले टेंपो कितना किराया प्रति सवारी ले रहे हैं। उसके आसपास ही रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह तय है कि किराया ऑटो के किराए के आसपास ही रहे।