स्वाइन फ्लू: वाराणसी के अस्पतालों में जांच नहीं, बीएचयू में तीन दिन बाद मिल रही रिपोर्ट; इन बातों पर दें ध्यान
वाराणसी जिले के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं की जा रही है। उधर, बीएचयू में तीन दिन बाद रिपोर्ट मिल रही है। वहीं मंडलीय अस्पताल की आरटीपीसीआर मशीन कोरोना काल के बाद से बंद पड़ी है।
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वाराणसी जिले में स्वाइन फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में बेड आरक्षित कर आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं, लेकिन संक्रमण की पुष्टि के लिए जांच की व्यवस्था अब भी कमजोर है। मंडलीय अस्पताल की आरटीपीसीआर मशीन कोरोना काल के बाद से बंद पड़ी है।
जिला अस्पताल, रामनगर स्थित एलबीएस अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में भी स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा नहीं है। लक्षण वाले मरीजों के सैंपल जांच के लिए बीएचयू भेजे जा रहे हैं, जहां से रिपोर्ट आने में करीब तीन दिन लग रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल, एलबीएस अस्पताल समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को संभावित मरीजों के लिए बेड आरक्षित करने और सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जांच के लिए ज्यादातर अस्पताल बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग पर निर्भर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्वाइन फ्लू (एच1एन1) की आरटीपीसीआर जांच बीएचयू में हो रही है। यहां रोजाना करीब 50 मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में स्वाइन फ्लू से संक्रमित पूर्वांचल के 10 मरीजों का इलाज चल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने यह पता लगाना भी मुश्किल है कि जिले में संक्रमण के वास्तविक मामले कितने हैं।
रोज 10 हजार की ओपीडी, 1500-2000 में बुखार-सर्दी के लक्षण
जिले के प्रमुख सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में रोजाना औसतन करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 1500 से 2000 मरीज बुखार, खांसी, सिरदर्द, शरीर व मांसपेशियों में दर्द और सर्दी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। गंभीर लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लेकर बीएचयू भेजे जा रहे हैं और उन्हें एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।
आइसोलेशन की व्यवस्था नहीं, संक्रमण बढ़ने की आशंका
स्वास्थ्य विभाग के सामने एक और चुनौती संभावित मरीजों को रिपोर्ट आने तक अलग रखने की है। पर्याप्त क्वारंटीन व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ मरीजों को घर भेज दिया जाता है। ऐसे में यदि मरीज संक्रमित हुआ तो रिपोर्ट आने तक वह परिवार और आसपास के लोगों के संपर्क में रह सकता है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
पूर्वांचल में बीएचयू के बाद मंडलीय अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। यहां रोजाना करीब 1200 से 1500 मरीज ओपीडी में आते हैं। अस्पताल में लगी आरटीपीसीआर मशीन कोरोना काल के बाद से बंद है। स्वाइन फ्लू के संभावित खतरे के बावजूद फिलहाल इससे जांच नहीं हो रही है। अस्पताल में केवल सैंपल लिए जा रहे हैं और जांच के लिए बीएचयू भेजे जा रहे हैं। इस बारे में मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि मशीन खराब होने की जानकारी सीएमओ या अपर निदेशक ही दे पाएंगे।
मंडलीय अस्पताल में मशीन किट के अभाव में बंद है। यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो इसे दोबारा शुरू करा दिया जाएगा। जिले के सभी अस्पतालों को व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर मरीजों का तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए बीएचयू भेजा जा रहा है। मंडलीय अस्पताल की समस्याओं को एसआईसी से बात कर तत्काल दूर कराया जाएगा। -डॉ. एनपी सिंह, सीएमओ
ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीज
- बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल : 5000-8000
- मंडलीय अस्पताल : 1200-1500
- जिला अस्पताल : 1200-1700
- रामनगर एलबीएस अस्पताल : 600-800
- 64 सीएचसी-पीएचसी करीब : 2000
क्या करें
- हाथों को बार-बार साबुन से धोएं।
- खांसते और छींकते समय मुंह ढकें।
- लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- पर्याप्त आराम करें और तरल पदार्थ लेते रहें।
- लक्षण होने पर भीड़ में जाने से बचें।
क्या न करें
- बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न लें।
- बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
- अफवाहों पर भरोसा न करें।