{"_id":"5a52541c4f1c1bd5178b56ca","slug":"swarupanand-saraswati-said-modi-government-nothing-for-sanatan-dharm","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मोदी सरकार में सिर्फ सनातन धर्म पर कुठाराघात हुआः स्वरूपानंद सरस्वती ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोदी सरकार में सिर्फ सनातन धर्म पर कुठाराघात हुआः स्वरूपानंद सरस्वती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 08 Jan 2018 02:15 PM IST
विज्ञापन
श्रीविद्यामठ में स्वामी स्वारूपानंद सरस्वती जी महाराज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
द्वारका-शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रविवार को वाराणसी के श्री विद्या मठ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बनारस में चुनाव लड़ने आए थे तो कहा था कि ‘मैं आया नहीं हूं, गंगा मैया ने मुझे बुलाया है।
’हमें भी उम्मीद जगी थी कि इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से गंभीर प्रयास होंगे लेकिन सनातन धर्म पर कुठाराघात करने के सिवाय कुछ नहीं किया गया। गंगा मंत्रालय का गठन सिर्फ दिखावे के लिए किया गया। सरकार के प्रयासों में कहीं कोई गंभीरता नहीं दिखती।
गंगा और गाय पर प्रधानमंत्री के वादों का जिक्र करते हुए कहा कि गंगा स्वच्छता के नाम पर देव प्रतिमाओं का विसर्जन तो रोक दिया गया लेकिन नालों का गिरना नहीं रोका जा सका। गंगा पर बने बांधों का कोई निराकरण नहीं हुआ।
विज्ञापन
हालात ऐसे हो गए हैं कि मौजूदा समय प्रयाग और काशी की गंगा में गंगा का जल ही नहीं है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार रोकने की सलाह देने वालों को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। कहा कि ऐसी सलाह देने वाले गंगा के मूल चरित्र को ही नहीं जानते।
अंतिम संस्कार के बाद हड्डी और मांस का जो पिंड गंगा में प्रवाहित किया जाता है, वह बालू में परिवर्तित हो जाता है। वहीं नर्मदा में फेंका गया पिंड पत्थर में बदल जाता है। गंगा के मौलिक रूप-स्वरूप को बनाए रखने की कोशिश के बजाय अनर्गल बातें कह कर सनातनी समाज को भ्रमित किया जा रहा है।
बौद्ध काल में भी ऐसी कोशिशें हुई थीं। गंगा की पुन: प्रतिष्ठा का श्रेय आदिजगद्गुरु शंकराचार्य महाराज को ही जाता है। उन्हीं के प्रयासों से पुन: गंगा स्नान का क्रम शुरू हुआ जो अब तक यथावत है। सनातनी लोग गंगा के प्रदूषित जल में स्नान करके प्राण त्याग देंगे लेकिन गंगा को नहीं छोड़ेंगे।
विज्ञापन
’हमें भी उम्मीद जगी थी कि इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से गंभीर प्रयास होंगे लेकिन सनातन धर्म पर कुठाराघात करने के सिवाय कुछ नहीं किया गया। गंगा मंत्रालय का गठन सिर्फ दिखावे के लिए किया गया। सरकार के प्रयासों में कहीं कोई गंभीरता नहीं दिखती।
विज्ञापन
गंगा और गाय पर प्रधानमंत्री के वादों का जिक्र करते हुए कहा कि गंगा स्वच्छता के नाम पर देव प्रतिमाओं का विसर्जन तो रोक दिया गया लेकिन नालों का गिरना नहीं रोका जा सका। गंगा पर बने बांधों का कोई निराकरण नहीं हुआ।
विज्ञापन
हालात ऐसे हो गए हैं कि मौजूदा समय प्रयाग और काशी की गंगा में गंगा का जल ही नहीं है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार रोकने की सलाह देने वालों को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। कहा कि ऐसी सलाह देने वाले गंगा के मूल चरित्र को ही नहीं जानते।
अंतिम संस्कार के बाद हड्डी और मांस का जो पिंड गंगा में प्रवाहित किया जाता है, वह बालू में परिवर्तित हो जाता है। वहीं नर्मदा में फेंका गया पिंड पत्थर में बदल जाता है। गंगा के मौलिक रूप-स्वरूप को बनाए रखने की कोशिश के बजाय अनर्गल बातें कह कर सनातनी समाज को भ्रमित किया जा रहा है।
बौद्ध काल में भी ऐसी कोशिशें हुई थीं। गंगा की पुन: प्रतिष्ठा का श्रेय आदिजगद्गुरु शंकराचार्य महाराज को ही जाता है। उन्हीं के प्रयासों से पुन: गंगा स्नान का क्रम शुरू हुआ जो अब तक यथावत है। सनातनी लोग गंगा के प्रदूषित जल में स्नान करके प्राण त्याग देंगे लेकिन गंगा को नहीं छोड़ेंगे।
महिलाएं स्वयं के उद्धार के लिए करें पतिव्रत धर्म का पालन
शंकराचार्य
- फोटो : File Photo
स्वामी स्वरूपानंद ने शंकराचार्य पद के लिए नेपाल की महंत हेमागिरी के आवेदन के सवाल पर कहा कि महिलाओं को स्वयं के उद्धार के लिए केवल पतिव्रत धर्म का पालन करना चाहिए। उन्हें इसके अलावा और कोई कार्य करने की अनुमति सनातन धर्म नहीं देता है।
वहीं, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध से जुड़े सवाल पर कहा कि धार्मिक कार्यों की ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक वातावरण पवित्र होता है। बंद ही कराना है तो पहले मस्जिदों से लाउडस्पीकर बंद कराए जाएं। फिर हम भी तय कर लेंगे कि हमें क्या करना है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि मुस्लिमों का एक ही धर्म ग्रंथ कुरान है। ईसाई समाज के पास सिर्फ बाइबिल है लेकिन सनातनी समाज के पास वेद, पुराण, उपनिषद आदि बहुत कुछ हैं। किसी एक व्यक्ति द्वारा इन सभी को समझना और समाज को समझा पाना संभव नहीं।
इसलिए आदिगुरु ने चार पीठों की स्थापना की। चारों पीठों को अलग-अलग दायित्व सौंपे। चारों पीठ चार वेदों के हिसाब से बनाई गई हैं। फर्जी संतों-महंतों को भी कड़ा संदेश दिया। कहा कि आम आदमी इन्हें महत्व देना बंद कर दे तो इनकी सारी गतिविधि तुरंत खत्म हो जाएं।
शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्री राम की जन्मभूमि है। वहां माता कौशल्या की गोद में खेलने वाले प्रभु राम का मंदिर बनेगा। हम न्यायालय में इस वाद पर एक पक्ष हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई पर हमारी संस्था अपना पक्ष रखेगी।
वहीं, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध से जुड़े सवाल पर कहा कि धार्मिक कार्यों की ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक वातावरण पवित्र होता है। बंद ही कराना है तो पहले मस्जिदों से लाउडस्पीकर बंद कराए जाएं। फिर हम भी तय कर लेंगे कि हमें क्या करना है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि मुस्लिमों का एक ही धर्म ग्रंथ कुरान है। ईसाई समाज के पास सिर्फ बाइबिल है लेकिन सनातनी समाज के पास वेद, पुराण, उपनिषद आदि बहुत कुछ हैं। किसी एक व्यक्ति द्वारा इन सभी को समझना और समाज को समझा पाना संभव नहीं।
इसलिए आदिगुरु ने चार पीठों की स्थापना की। चारों पीठों को अलग-अलग दायित्व सौंपे। चारों पीठ चार वेदों के हिसाब से बनाई गई हैं। फर्जी संतों-महंतों को भी कड़ा संदेश दिया। कहा कि आम आदमी इन्हें महत्व देना बंद कर दे तो इनकी सारी गतिविधि तुरंत खत्म हो जाएं।
शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्री राम की जन्मभूमि है। वहां माता कौशल्या की गोद में खेलने वाले प्रभु राम का मंदिर बनेगा। हम न्यायालय में इस वाद पर एक पक्ष हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई पर हमारी संस्था अपना पक्ष रखेगी।