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हम अब आजाद, देश को अहिंसक आंदोलन की जरूरत
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राजातालाब/रोहनिया। जीवन के 99 वर्ष पूरे कर चुके स्वतंत्रता सेनानी सीताराम शास्त्री के मन में अब भी युवाओं जैसा जोश और जज्बा है। डीह गंजारी गांव निवासी सीताराम शास्त्री का कहना है कि अब देश में सामाजिक आंदोलन चलाने की जरूरत है। कुरीतियों के खात्मे, भेदभाव को हटाने से ही देश का नव निर्माण हो सकता है।
सीताराम शास्त्री ने कहा कि अब हम आजाद हैं। देशवासियों, राजनेताओं, समाज सुधारकों को अहिंसक आंदोलन चलाना चाहिए। जब देश में हिंसा की बात सुनता हूं तो दिल बैठ जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ युवा क्रांतिकारियों ने आंदोलन किया था। वे किशोरावस्था में उस आंदोलन का हिस्सा बने थे। गंगापुर का क्षेत्र में लोग रह कर नाम पता गोपनीय रख आंदोलन चलाते थे। किंतु वह आंदोलन विदेशी आक्रांता के प्रति था। लेकिन अब अपना राष्ट्र अपने लोग हैं। सभी प्रांत भाषा व धर्म के लोगों को राष्ट्रधर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, आज आवश्यकता है कि आंदोलन को अहिंसक करते हुए सामाजिक आंदोलन चलाए जाए। अशिक्षा, विषमताओं का खात्मा करने के लिए युवाओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए। गांधी जी ने आजादी के दौरान भी श्रम और समय को महत्व दिया था। आजाद भारत में हर एक व्यक्ति को श्रम करते हुए देश को आगे बढ़ाना चाहिए। यह कतई नहीं सोचा जाना चाहिए कि शारीरिक श्रम करने वाला हेय और मानसिक श्रम करने वाला श्रेष्ठ है।
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सीताराम शास्त्री ने कहा कि अब हम आजाद हैं। देशवासियों, राजनेताओं, समाज सुधारकों को अहिंसक आंदोलन चलाना चाहिए। जब देश में हिंसा की बात सुनता हूं तो दिल बैठ जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ युवा क्रांतिकारियों ने आंदोलन किया था। वे किशोरावस्था में उस आंदोलन का हिस्सा बने थे। गंगापुर का क्षेत्र में लोग रह कर नाम पता गोपनीय रख आंदोलन चलाते थे। किंतु वह आंदोलन विदेशी आक्रांता के प्रति था। लेकिन अब अपना राष्ट्र अपने लोग हैं। सभी प्रांत भाषा व धर्म के लोगों को राष्ट्रधर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, आज आवश्यकता है कि आंदोलन को अहिंसक करते हुए सामाजिक आंदोलन चलाए जाए। अशिक्षा, विषमताओं का खात्मा करने के लिए युवाओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए। गांधी जी ने आजादी के दौरान भी श्रम और समय को महत्व दिया था। आजाद भारत में हर एक व्यक्ति को श्रम करते हुए देश को आगे बढ़ाना चाहिए। यह कतई नहीं सोचा जाना चाहिए कि शारीरिक श्रम करने वाला हेय और मानसिक श्रम करने वाला श्रेष्ठ है।
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