ज्ञानवापी मामला: शृंगार गौरी व अन्य विग्रहों के सर्वे और अधिवक्ता आयुक्त को हटाने के मामले में हुई बहस, कोर्ट में कल फिर होगी सुनवाई
ज्ञानवापी मामले में अदालती कार्यवाही के दौरान पक्षकार इस बात से सहमत दिखे कि अगर अदालत चाहे तो खुद अपनी देखरेख में कमीशन की कार्यवाही संपादित कराए। अदालत ने लगभग दो घंटे तक चली बहस को सुनने के बाद मंगलवार को फिर सुनवाई की तिथि नियत कर दी।
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वाराणसी में ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी व अन्य विग्रहों के सर्वे कराने और अधिवक्ता आयुक्त को हटाने के मामले में मंगलवार को न्यायालय में दोनों पक्ष के वकीलों ने दलीलें पेश कीं। हालांकि लंबी बहस के बाद भी कोई निर्णय नहीं हो पाया।
न्यायालय ने बहस जारी रखते हुए इस मामले में 11 मई की तिथि नियत की है। हिंदू पक्ष की आपत्ति पर मुस्लिम पक्ष ने एक सप्ताह का समय मांगा है। उधर, वादी पक्ष के वकीलों का दावा है कि न्यायालय ने आवश्यकता पड़ने पर खुद मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखने की भी बात की गई है।
सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल प्रति आपत्ति में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से कहा गया कि सर्वे के जरिए साक्ष्य सबूत एकत्र नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी ओर से पांच अधिवक्ता हैं, जबकि सर्वे में दो ही अधिवक्ताओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।
जबकि वादी पक्ष के 12 वकील अंदर मौजूद थे। उन्होंने न्यायालय में कहा कि शृंगार गौरी और ज्ञानवापी मस्जिद अलग-अलग है। ऐसे में मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी का कोई औचित्य नहीं है। वादी पक्ष ने इस आवेदन पर विपक्षी गणों पर न्यायालय के कार्य में बाधा डालने और जिला प्रशासन पर कोर्ट के आदेश के अनुपालन में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया।
डीजीसी सिविल महेंद्र पांडेय ने अपने जवाब में कहा कि प्रशासन कमीशन की कार्यवाही का प्रबल सहयोग कर रहा है। न्यायालय के आदेश को अमल कराने के लिए जिला प्रशासन तैयार है। अदालती कार्यवाही के दौरान पक्षकार इस बात से सहमत दिखे कि अगर अदालत चाहे तो खुद अपनी देखरेख में कमीशन की कार्यवाही संपादित कराए। अदालत ने लगभग दो घंटे तक चली बहस को सुनने के बाद मंगलवार को फिर सुनवाई की तिथि नियत कर दी।