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बनारस से खास लगाव, श्रद्धा रखते थे सुरेश अंगड़ी
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वाराणसी। रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी की बुधवार को कोरोना से असमय हुई मौत ने रेल अधिकारियों व कर्मचारियों को झकझोर दिया। हर वक्त रेलवे की भलाई और यात्रियों के साथ ही अधिकारियों कर्मचारियों की हित के बारे में सोचते थे। रेल राज्य मंत्री बनने के बाद एक साल में दो बार वाराणसी का दौरा करने वाले सुरेश अंगड़ी अभी हाल ही में लॉकडाउन के दौरान कैंट स्टेशन पर फंसे रेल यात्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करते हुए उनका कुशलक्षेम जाना था। यात्रियों से बातचीत में ही एक आत्मीय लगाव उनका दिखा था।
बनारस से खास लगाव रखते थे। इस साल 16 फरवरी को काशी महाकाल एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पड़ाव स्थित मैदान से रेल राज्य मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उस दौरान काशी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करके कायाकल्प को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया था। काशी स्टेशन के साथ ही राजघाट रेलवे पुल को नई तकनीक से संवारने को लेकर रेल राज्य मंत्री प्रयासरत थे। काशी से बहुत गहरा और खास लगाव रखते थे। अपार श्रद्धा उनकी बनारस को लेकर रहती थी। सितंबर के शुरुआती सप्ताह में रेल राज्य मंत्री ने उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम, डीआरएम और एडीआरएम संग रेलवे की समीक्षा बैठक ऑनलाइन की थी। उत्तर रेलवे वाराणसी के एडीआरएम रवि चतुर्वेदी ने बताया कि यह रेलवे के लिए अपूरणीय क्षति है। काशी स्टेशन के कायाकल्प को लेकर काफी प्रयासरत थे। 18 सितंबर 2019 में काशी स्टेशन का निरीक्षण करने आए तो बोले कि यह वाराणसी का काशी स्टेशन बिल्कुल अलग और ख़ास बनाया जाए। इसके बाद तेजी से काम हुआ। ठीक 6 माह बाद 16 फरवरी को रेल राज्य मंत्री पड़ाव स्थित पं दीनदयाल उपाध्याय स्मृति उपवन के शुभारंभ के मौके पर वाराणसी आए थे। यही से प्रधानमंत्री के संग उन्होंने देश की तीसरी कॉरपोरेट ट्रेन काशी महाकाल एक्सप्रेस को वीडियो कॉन्फ्रेंस से हरी झंडी दिखाकर कैंट स्टेशन से रवाना किया था। राजघाट पुल और अन्य स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर नए-नए आइडिया देते रहते थे।
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बनारस से खास लगाव रखते थे। इस साल 16 फरवरी को काशी महाकाल एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पड़ाव स्थित मैदान से रेल राज्य मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उस दौरान काशी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करके कायाकल्प को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया था। काशी स्टेशन के साथ ही राजघाट रेलवे पुल को नई तकनीक से संवारने को लेकर रेल राज्य मंत्री प्रयासरत थे। काशी से बहुत गहरा और खास लगाव रखते थे। अपार श्रद्धा उनकी बनारस को लेकर रहती थी। सितंबर के शुरुआती सप्ताह में रेल राज्य मंत्री ने उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम, डीआरएम और एडीआरएम संग रेलवे की समीक्षा बैठक ऑनलाइन की थी। उत्तर रेलवे वाराणसी के एडीआरएम रवि चतुर्वेदी ने बताया कि यह रेलवे के लिए अपूरणीय क्षति है। काशी स्टेशन के कायाकल्प को लेकर काफी प्रयासरत थे। 18 सितंबर 2019 में काशी स्टेशन का निरीक्षण करने आए तो बोले कि यह वाराणसी का काशी स्टेशन बिल्कुल अलग और ख़ास बनाया जाए। इसके बाद तेजी से काम हुआ। ठीक 6 माह बाद 16 फरवरी को रेल राज्य मंत्री पड़ाव स्थित पं दीनदयाल उपाध्याय स्मृति उपवन के शुभारंभ के मौके पर वाराणसी आए थे। यही से प्रधानमंत्री के संग उन्होंने देश की तीसरी कॉरपोरेट ट्रेन काशी महाकाल एक्सप्रेस को वीडियो कॉन्फ्रेंस से हरी झंडी दिखाकर कैंट स्टेशन से रवाना किया था। राजघाट पुल और अन्य स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर नए-नए आइडिया देते रहते थे।
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