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सत्यम, शिवम, सुंदरम के आदर्श से प्रभावित थे सुकुमार कवि

Thu, 20 May 2021 01:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 01:01 AM IST
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Sukumar Kavi was influenced by the ideals of Satyam, Shivam, Sundaram
प्रकृति के सुकुमार कवि कहे जाने वाले पद्मभूषण सुमित्रानंदन पंत का काशी से भी गहरा लगाव था। शिक्षा के केंद्र के रूप में बनारस में ही उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। विलक्षण प्रतिभा के सौंदर्यान्वेषी, भौतिक, आध्यात्मिक प्रगति और सांस्कृतिक क्रांति के अग्रदूत थे।
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प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश संयोजक विश्वनाथ दुबे ने बताया कि सुमित्रानंदन पंत जन्मे तो हिमाचल के अंचल में लेकिन उन्होंने संपूर्ण हिंदी क्षेत्र को अपनी कविताओं के साैंदर्य से सम्मोहित कर दिया। उनका पूरा साहित्य जीवन सत्यम, शिवम, सुंदरम के आदर्श से प्रभावित था। उनका जन्म 20 मई 1900 में बागेश्वर जिले के कौशानी गांव में हुआ था। उनका असली नाम गोसाइन दत्त था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद मैट्रिक की पढ़ाई के लिए वह अपने बड़े भाई के साथ वाराणसी आ गए और 18 साल की उम्र में जयनारायण इंटर कॉलेज से पढाई पूरी की।
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स्नातक की पढ़ाई करने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय आ गए, लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़कर उन्होंने महात्मा गांधी से प्रभावित होकर सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। इन्हीं के सुझाव पर ऑल इंडिया रेडियो का नाम आकाशवाणी दिया गया। उनको मधुमेह की बीमारी थी। उनका देहांत 28 दिसंबर 1977 को इलाहाबाद में हुआ था।
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साहित्यिक यात्रा
सुमित्रानंदन जी ने कविता लिखना चौथी कक्षा से ही शुरू कर दिया था, जब वह मात्र सात साल के थे। 1918 तक वह एक प्रगतिवादी प्राकृतिक कवि के तौर पर पहचाने जाने लगे। हिंदी जगत को पंत जी ने कई अनुपम कृतियां दी हैं। 1922 में उनका पहला काव्य संग्रह उच्चवास प्रकाशित हुआ था।
सम्मान
1960 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
1961 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान प्राप्त हुआ।
1968 में वह ज्ञानपीठ पुरस्कार (चिदम्बरा) पाने वाले पहले कवि बने।
1969 में लोकायतन के लिए उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला।
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