बीएचयू: डॉ फिरोज खान के समर्थन में उतरे सैकड़ों छात्र, विरोध में 14 दिन से धरना भी जारी
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बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय(एसवीडीवी) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर सैकड़ों छात्र सिंह द्वार पर उतर आए हैं। तो वहीं लगातार 14वें दिन से छात्र भी विरोध में धरने पर बैठे हैं। डा फिरोज के समर्थन में बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद भी आए हैं।
डॉ. फिरोज खान के समर्थन में जॉंइट एक्शन कमेटी के बैनर तले छात्रों ने सिंह द्वार पर जुटकर फिरोज के समर्थन में नारे भी लगाए। उनका कहना था कि शिक्षक की नियुक्ति का विरोध गलत है, इस पर विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की गई।
Varanasi: Members of National Students' Union of India (NSUI) and All India Students Association (AISA) hold a demonstration at Banaras Hindu University (BHU) in support of Professor Feroz Khan, who is facing protests for being appointed in BHU's Sanskrit Department. pic.twitter.com/mkYeubet8l
विज्ञापन विज्ञापन— ANI UP (@ANINewsUP) November 20, 2019
भाषा को धर्म से जोड़कर देखना गलत- प्रो. आफताब
बीएचयू प्रशासन ने जो भी किया नियुक्ति में वह सही है। यह नई बात नहीं है। बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी कहते हैं कि विश्वविद्यालय का मतलब है कि चाहे वह कोई हो किसी धर्म, जाति का हो। अगर योग्य है तो नियुक्ति करना गलत नहीं है। अगर चयन समिति ने डॉ. फिरोज खान की योग्यता के अनुसार उनका फैसला लिया है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए।
विभिन्न विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे छात्र भी है जो उर्दू पढ़ रहे हैं। बीएचयू में ही संस्कृत पढ़ने वाली एक मुस्लिम छात्रा को दीक्षांत समारोह में टॉपर होने पर सर्वाधिक मेडल मिल चुका है। क्या ऐसे लोग संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं।
किसी भाषा, को धर्म से नहीं बाधा जा सकता है। मौलवी महेश प्रसाद ऐसे शिक्षक थे, जिन्होंने हिंदू होते हुए भी अरबी पढ़ा। उनकी किताबों को भी लोग कोट करते हैं। उर्दू विभाग में ही कई ऐसे छात्र हैं जो हिंदू हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। विरोध करने वाले छात्रों को इसको समझने की जरूरत है।
जो भी बोलना है पीआरओ ही बोलेंगे- कुलसचिव
विश्वविद्यालय में डॉ. फिरोज खान को लेकर चल रहे विवाद के मामले में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत का प्रयास कई दिनों से चल रहा है लेकिन उनका फोन नहीं उठ रहा है। बुधवार को जब कुलसचिव डॉ नीरज त्रिपाठी से बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाते ही प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जो भी बोलना है, इसमें पीआरओ ही बोलेंगे। बेहतर होगा कि उन्हीं से बात की जाए।
न्याय न मिलने पर कोर्ट जाने का फैसला
डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर 14 दिन से कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है। बुधवार को शाम धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए छात्रों ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि आपत्ति विरोध फिरोज खान से नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन से हैं।
कला संकाय में अगर संस्कृत भाषा में किसी शिक्षक की तैनाती हो तो कोई आपत्ति नहीं लेकिन एसवीडीवी में इस तरह की नियुक्ति महामना के आदर्शों के विपरीत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति पर अगर पुनर्विचार नहीं किया तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस बीच बुधवार को भी दिन में छात्रों ने देवी भजनों की प्रस्तुति की।
संकाय के छात्र नियुक्ति के विरोध में 14 दिन से संकाय में तालाबंदी कर कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे हैं। अब तक जहां विश्वविद्यालय प्रशासन कोई ठोस फैसला नहीं ले सका है वहीं संकाय में तालाबंदी से पढ़ाई ठप हो गई है। कहीं से कोई निर्णय न हो पाने की दशा में संकाय प्रशासन भी लाचार होकर नोटिस चस्पा कर छात्रों से संकाय खुलवाने में सहयोग मांगा है।