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बीएचयू: हास्टल खुलने के बाद लौटे छात्रों का छलका दर्द, अधूरी तैयारी के बीच देंगे परीक्षा

Sun, 17 Nov 2019 10:01 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 17 Nov 2019 10:01 PM IST
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student imotional after reaching hostel lbs in bhu varanasi
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

तीन दिन बाद रविवार को हास्टल खुलने के बाद पहुंचे बीएचयू छात्रों का दर्द छलक पड़ा। किसी हाथ में पट्टी बंधी थी तो किसी के सिर में चोट लगी थी। पैरों में इतनी चोट लगी थी कि हॉस्टल की सीढ़ी चढ़ पाने में उन्हें तकलीफ हो रही थी। इन सबके बीच सभी को दो दिन बाद शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षा की चिंता सता रही थी।

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बातचीत में उन्होंने प्रॉक्टोरियल बोर्ड की मौजूदगी हॉस्टल के कमरों में घुसकर पुलिस द्वारा पिटाई का आरोप लगाते हुए इसके लिए बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस की पिटाई से कराहते छात्रों ने कहा कि एक ओर परीक्षा की तैयारी अधूरी है, वहीं चोट के कारण अब मुश्किल और बढ़ गई है।
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बीएचयू के बिरला और एलबीएस हॉस्टल के छात्रों के बीच गुरुवार को मारपीट, पत्थरबाजी के बाद जब मामला बढ़ गया तो पुलिस एलबीएस हॉस्टल में घुसी। इस दौरान 15 छात्रों को हॉस्टल से उठाकर पुलिस थाने भी ले गई। देर शाम हॉस्टल बंद करने का निर्णय लेते हुए सभी छात्रों को बाहर कर दिया गया। अब रविवार को छात्र हॉस्टल पहुंचे तो गेट पर रखे रजिस्टर में नए सिरे से पंजीकरण के बाद उन्हें कमरे में जाने की अनुमति मिली।

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छात्र हॉस्टल आए तो लेकिन उनके चेहरे पर पुलिस की पिटाई का दर्द झलक रहा था। कहा कि जिन छात्रों को पुलिस बाहरी कहकर ले गई वह विश्वविद्यालय के ही छात्र थे, उनके पास परिचय पत्र भी था। अगर हॉस्टल में बाहरी छात्र रह रहे हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, उनका कहना है कि कुछ लोगों की वजह से सभी की पुलिस ने पिटाई की। यहां तक कि दिव्यांग छात्रों को भी नहीं छोड़ा।

बीएचयू प्रशासन चाहता तो नहीं बिगड़ता माहौल
कमरों में आए छात्रों का कहना है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड की भारी भरकम फौज के बाद पुलिस हॉस्टल में क्यों घुसी और पिटाई की यह समझ से परे हैं। जिस समय पुलिस कमरों को खुलवाकर पिटाई कर रही थी, उस समय किसी ने रोकने का प्रयास नहीं किया। पुलिस को परिचय पत्र चेक कर ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए।

बोले छात्र- हॉस्टल में कैसे घुसी पुलिस, समझ से परे
विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड पर्याप्त है। पुलिस की कोई जरूरत नही। हॉस्टल में घुसकर पुलिस ने पिटाई की, इस वजह से हाथ टूट गया, सर में भी चोट आई। अब परीक्षा कैसे देंगे समझ में नहीं आ रहा है। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।-विद्यासागर सिंह

बीस नवंबर से परीक्षा है और हॉस्टल बंद कर दिया गया। तीन दिन तक लंका गेट पर धरना देने के दौरान भी तैयारी चलती रही। बीएचयू प्रशासन घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। छोटी-छोटी सी बात के लिए पुलिस को कैंपस में बुलाना पड़ रहा है, इस पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सोचना होगा।-हिमांशु पांडेय

परीक्षा के समय हॉस्टल बंद करने का फैसला गलत है। जिस तरह से पुलिस ने घुसकर पिटाई की लगता है कि कहीं और का गुस्सा पुलिस ने छात्रों पर उतारा। जो छात्र पढ़ रहे थे, उनकी भी जमकर पिटाई की गई। इसकी अनुमति बीएचयू प्रशासन ने कैसे दी यह समझ से परे हैं। परीक्षा की तैयारी की चिंता है।-शुभम कुमार

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