{"_id":"5887b34e4f1c1bbd7ecf55f8","slug":"strongman-trapped-in-purwanchal","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवा बदली, सकते में पूर्वांचल के बाहुबली ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवा बदली, सकते में पूर्वांचल के बाहुबली
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 25 Jan 2017 01:34 AM IST
विज्ञापन
मुख्तार अंसारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रमुख सियासी दलों के शीर्ष नेतृत्व के बदले मिजाज ने इस बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं को सकते में डाल दिया है। आमजन के बीच पैठ रखने वाले राजनीतिक दलों से दूर होने की कसक बाहुबलियों के हावभाव से साफ दिखाई दे रही है। हालांकि वे अपने समर्थकों के बीच यह विश्वास जगाए हुए हैं कि विधानसभा चुनाव में उन्हें हर हाल में जीत मिलेगी। साथ ही, यह दावा भी कर रहे हैं कि वे अपने आसपास की सीटों के चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में कामयाब जरूर रहेंगे।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं से दूरी बनाने की शुरुआत सबसे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की। अखिलेश के मन-मिजाज को भांप कर अतीक अहमद ने खुद ही कह दिया कि उनके लिए चुनाव लड़ना जरूरी नहीं है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भदोही के चर्चित विधायक विजय मिश्रा का टिकट काटा तो बाहुबलियों की बेचैनी और बढ़ गई।
सपा के साथ मिलकर चुनाव में उतरने का एलान कर चुके कौमी एकता दल के वर्तमान विधायक मुख्तार अंसारी कहां से चुनाव लड़ेेंगे, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। जबकि, मुख्तार अंसारी की मौजूदा सीट मऊ सदर से सपा अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इसी तरह बसपा अरसा पहले ही जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह से किनारा कर चुकी है तो भाजपा ने आजमगढ़ के रमाकांत यादव की टिकट संबंधी मांगों को कोई खास तवज्जो नहीं दी। प्रमुख सियासी दलों के इस बदले रुख से हैरान बाहुबली अब अपने लिए नई राजनीतिक जमीन की तलाश में हैं।
विज्ञापन
जरायम की दुनिया में कभी खासी दखल रखने वाला मुन्ना बजरंगी इस बार सियासी गलियारों की चर्चाओं से दूर है। बताया जाता है कि मुन्ना की पत्नी विधानसभा चुनाव लड़ेगी लेकिन कहां से यह तय नहीं है। वहीं, बीते साल एमएलसी चुने गए बृजेश सिंह की पत्नी पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह के वाराणसी या चंदौली जिले की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी इस बारे में बृजेश खेमे की ओर से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं से दूरी बनाने की शुरुआत सबसे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की। अखिलेश के मन-मिजाज को भांप कर अतीक अहमद ने खुद ही कह दिया कि उनके लिए चुनाव लड़ना जरूरी नहीं है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भदोही के चर्चित विधायक विजय मिश्रा का टिकट काटा तो बाहुबलियों की बेचैनी और बढ़ गई।
विज्ञापन
सपा के साथ मिलकर चुनाव में उतरने का एलान कर चुके कौमी एकता दल के वर्तमान विधायक मुख्तार अंसारी कहां से चुनाव लड़ेेंगे, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। जबकि, मुख्तार अंसारी की मौजूदा सीट मऊ सदर से सपा अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इसी तरह बसपा अरसा पहले ही जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह से किनारा कर चुकी है तो भाजपा ने आजमगढ़ के रमाकांत यादव की टिकट संबंधी मांगों को कोई खास तवज्जो नहीं दी। प्रमुख सियासी दलों के इस बदले रुख से हैरान बाहुबली अब अपने लिए नई राजनीतिक जमीन की तलाश में हैं।
विज्ञापन
जरायम की दुनिया में कभी खासी दखल रखने वाला मुन्ना बजरंगी इस बार सियासी गलियारों की चर्चाओं से दूर है। बताया जाता है कि मुन्ना की पत्नी विधानसभा चुनाव लड़ेगी लेकिन कहां से यह तय नहीं है। वहीं, बीते साल एमएलसी चुने गए बृजेश सिंह की पत्नी पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह के वाराणसी या चंदौली जिले की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी इस बारे में बृजेश खेमे की ओर से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।