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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Strict stance POCSO court Sentence pronounced within 22 days charge sheet following continuous hearings

पॉक्सो कोर्ट की सख्ती: आरोप पत्र दाखिल होने के बाद 22 दिन में सुनाई सजा, लगातार सुनवाई; जानें खास

Sun, 07 Jun 2026 12:53 PM IST
Aman Vishwakarma रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 07 Jun 2026 12:53 PM IST
सार

पॉक्सो कोर्ट की सख्ती और प्रभावी कार्यवाही के चलते आरोप पत्र दाखिल होने के महज 22 दिनों के भीतर ही एक मामले में सजा सुनाई गई। लगातार सुनवाई, अनावश्यक स्थगन पर रोक और डिजिटल तकनीक के उपयोग से मामलों के निस्तारण की गति में तेजी आई है। इससे पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।

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Strict stance POCSO court Sentence pronounced within 22 days charge sheet following continuous hearings
पॉक्सो कोर्ट की सख्ती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में तेजी दिखाई है। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अदालत ने चार मामलों में 22 से 45 दिन में ही दोषियों को सजा सुनाई। 12 मामलों में ट्रायल चल रहा है। इन मामलों में जल्द ही आदेश आ सकता है। 

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पीड़ित पक्ष की गवाही, लगातार सुनवाई, अनावश्यक स्थगन पर रोक और डिजिटल माध्यमों के प्रयोग से मामलों के निस्तारण में तेजी आई है। विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो कोर्ट) संतोष कुमार सिंह ने बताया कि त्वरित फैसलों से अपराध करने वालों में मन में कानून का भय बढ़ता है। अभियोजन विभाग की पैरवी और पुलिस की विवेचना प्रभावी रहती है तभी मामलों का निपटारा तेजी से हो पाता है। 
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मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने दीपक कुमार के खिलाफ 2021 में पॉक्सो एक्ट की प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले की विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया गया। अदालत ने 22 दिन में सुनवाई पूरी की और दीपक को दोषी करार दिया। साथ ही छह साल की सजा सुनाई। 

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बीएनएस की धारा में 2025 में मामला दर्ज हुआ। अदालत ने सुनवाई की और एक महीने में ही सजा सुना दी। जून में धीरज कुमार राठौर ने नाबालिग से दुष्कर्म किया था। अदालत ने चार जुलाई को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। बीएनएस के तहत सजा पाने वाली यह वाराणसी की पहली पत्रावली बनी थी।

लंका थाने की पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके एक महीने के अंदर ही अदालत ने जुगनू उर्फ भरत को दोषी करार दिया और उसे 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह मामला 2021 में सामने आया था।

मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में 2024 में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया। पुलिस ने बीएनएस के तहत इरफान के खिलाफ मामला दर्ज किया और विवेचना पूरी करके अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अदालत ने 45 दिन में सुनवाई पूरी की और इरफान को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

पाॅक्सो से जुड़े मामलों में त्वरित एवं निष्पक्ष विवेचना हमारी प्राथमिकता है। पुलिस टीम ने प्रभावी साक्ष्य संकलन और समयबद्ध आरोप पत्र दाखिल कर दोषियों को सजा दिलवाने में भूमिका निभाई है। ऐसे मामलों में पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। - मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त

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