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सीएम योगी ने दी विकास कार्यों में तेजी लाने की हिदायत,अफसर अभी से तलाशने लगे देरी के बहाने
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 07 Apr 2017 10:41 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के विकास की कुछ चुनिंदा योजनाओं को 30 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विकास के अन्य कार्यों की गति तेज करने की हिदायत भी अधिकारियों को दी गई है। अधिकारियों ने हामी तो भरी ली है लेकिन काम के तय समय पर पूरा होने में संशय है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने बहाने तलाशने शुरू कर दिए हैं।
उन्हें लगता है कि इस तरह से वह कार्रवाई की स्थिति आने पर से खुद को बचा पाएंगे।
सामने घाट गंगा पुल का निर्माण कार्य अधूरा है। इसे सेतु निगम को पूरा करना है। यहां पर छह प्रतिशत काम बचा है। मंडुवाडीह आरओबी का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा है। रेलवे अपना काम पूरा कर दे तो इसे भी 30 जून तक पूरा किया जा सकता है।
दूसरी ओर से कोनिया से सलापुर और फुलवरिया फ्लाईओवर का प्रस्ताव भेजा गया है। कोनिया के काम को भी तय समय पर पूरा किया जा सकता है।
जिला प्रशासन, सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि गरमी में मजदूर आसानी से नहीं मिलते हैं। पानी की समस्या होगी। निर्माण कार्य को पक्का होने से पहले शटरिंग खोली नहीं जा सकती है। इसके अलावा अधिकारी दो विभागों से जुड़े कामों में एक-दूसरे के पाले में फेंकने में भी जुट गए हैं।
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इस बीच योगी के एक्शन मोड में आने के बाद कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने गुरुवार को विकास कार्योे से जुड़े विभागीय अधिकारियों, सेतु निगम और भूमि अध्याप्ति अधिकारी को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। बैठक में सभी कामों की समीक्षा की जाएगी। निर्माणाधीन कार्यों पर विशेष फोकस रहेगा।
रिंग रोड की बाधाएं दूर कर हर हाल में जल्द से जल्द काम शुरू कराना है। अब कमिश्नर हर सप्ताह निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा करेंगे। साथ ही नए प्रोजेक्ट पर भी पूरी तैयारी के साथ काम शुरू कराया जाएगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल होने के बाद कमिश्नर मंगलवार रात ही वाराणसी आ गए थे। उन्होंने बुधवार को डीएम योगेश्वर राम मिश्र के साथ बैठक में तय हुए बिंदुओं पर चर्चा की।
इन पर भी होगा फोकस
- 220 लाख से मारकंडेय महादेव कैथी का समन्वित विकास
- सामने घाट, बलुवा सेतु सहित मंडुवाडीह एवं चौकाघाट उपरगामी सेतु निर्माण सहित लहरतारा-शिवपुर उपरगामी बाईपास मार्ग का निर्माण
- फुलवरिया आरओबी के लिए 181 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
- आईपीडीएस के तहत भूमिगत वायरिंग
- रिंग रोड और रामनगर में टर्मिनल का निर्माण
- गोइठहां और दीनापुर में एसटीपी
- जिले को 2 अक्तूबर तक ओडीएफ घोषित करना
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उन्हें लगता है कि इस तरह से वह कार्रवाई की स्थिति आने पर से खुद को बचा पाएंगे।
सामने घाट गंगा पुल का निर्माण कार्य अधूरा है। इसे सेतु निगम को पूरा करना है। यहां पर छह प्रतिशत काम बचा है। मंडुवाडीह आरओबी का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा है। रेलवे अपना काम पूरा कर दे तो इसे भी 30 जून तक पूरा किया जा सकता है।
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दूसरी ओर से कोनिया से सलापुर और फुलवरिया फ्लाईओवर का प्रस्ताव भेजा गया है। कोनिया के काम को भी तय समय पर पूरा किया जा सकता है।
जिला प्रशासन, सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि गरमी में मजदूर आसानी से नहीं मिलते हैं। पानी की समस्या होगी। निर्माण कार्य को पक्का होने से पहले शटरिंग खोली नहीं जा सकती है। इसके अलावा अधिकारी दो विभागों से जुड़े कामों में एक-दूसरे के पाले में फेंकने में भी जुट गए हैं।
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इस बीच योगी के एक्शन मोड में आने के बाद कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने गुरुवार को विकास कार्योे से जुड़े विभागीय अधिकारियों, सेतु निगम और भूमि अध्याप्ति अधिकारी को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। बैठक में सभी कामों की समीक्षा की जाएगी। निर्माणाधीन कार्यों पर विशेष फोकस रहेगा।
रिंग रोड की बाधाएं दूर कर हर हाल में जल्द से जल्द काम शुरू कराना है। अब कमिश्नर हर सप्ताह निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा करेंगे। साथ ही नए प्रोजेक्ट पर भी पूरी तैयारी के साथ काम शुरू कराया जाएगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल होने के बाद कमिश्नर मंगलवार रात ही वाराणसी आ गए थे। उन्होंने बुधवार को डीएम योगेश्वर राम मिश्र के साथ बैठक में तय हुए बिंदुओं पर चर्चा की।
इन पर भी होगा फोकस
- 220 लाख से मारकंडेय महादेव कैथी का समन्वित विकास
- सामने घाट, बलुवा सेतु सहित मंडुवाडीह एवं चौकाघाट उपरगामी सेतु निर्माण सहित लहरतारा-शिवपुर उपरगामी बाईपास मार्ग का निर्माण
- फुलवरिया आरओबी के लिए 181 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
- आईपीडीएस के तहत भूमिगत वायरिंग
- रिंग रोड और रामनगर में टर्मिनल का निर्माण
- गोइठहां और दीनापुर में एसटीपी
- जिले को 2 अक्तूबर तक ओडीएफ घोषित करना
तीन साल आगे बढ़ गए 793 करोड़ के काम
793 करोड़ की सीवेज योजना जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की कछुआ चाल से काम आठ साल बाद भी अधूरा है। इसे तीन साल पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था।
2009 में सीवेज पाइप लाइन, पंपिंग स्टेशन, स्टार्म ड्रेनेज वाटर (बरसाती पानी की निकासी) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हुआ लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता के चलते अब तक सिर्फ सीवेज पाइप लाइन और स्टार्म ड्रेनेज वाटर का काम जैसे-तैसे पूरा तो हो पाया है। सीवेज प्लांट अब तक नहीं बनने से पाइप बिछाने का लाभ शहरियों को नहीं मिल सका है। सीवेज अब भी गंगा में गिर रहा है।
जेएनएनयूआरएम के तहत सीवेज गोइठहां में नए 120 और दीनापुर में 140 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का विस्तार कराया जा रहा है। दोनों प्लांट का निर्माण कार्य इसी मार्च तक पूरा होना था लेकिन जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की सुस्त चाल से काम अब तक 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया है।
वहीं अस्सी से राजघाट तक शाही नाले, इसके अलावा चौकाघाट, कोनिया और नगवा में सीवेज पंपिंग स्टेशन का कार्य भी अधूरा है। रमना में बनने वाले 50 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की शुरूआत ही नहीं हो सकी है।
2009 में सीवेज पाइप लाइन, पंपिंग स्टेशन, स्टार्म ड्रेनेज वाटर (बरसाती पानी की निकासी) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हुआ लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता के चलते अब तक सिर्फ सीवेज पाइप लाइन और स्टार्म ड्रेनेज वाटर का काम जैसे-तैसे पूरा तो हो पाया है। सीवेज प्लांट अब तक नहीं बनने से पाइप बिछाने का लाभ शहरियों को नहीं मिल सका है। सीवेज अब भी गंगा में गिर रहा है।
जेएनएनयूआरएम के तहत सीवेज गोइठहां में नए 120 और दीनापुर में 140 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का विस्तार कराया जा रहा है। दोनों प्लांट का निर्माण कार्य इसी मार्च तक पूरा होना था लेकिन जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की सुस्त चाल से काम अब तक 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया है।
वहीं अस्सी से राजघाट तक शाही नाले, इसके अलावा चौकाघाट, कोनिया और नगवा में सीवेज पंपिंग स्टेशन का कार्य भी अधूरा है। रमना में बनने वाले 50 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की शुरूआत ही नहीं हो सकी है।