{"_id":"69597fc57c4e63e9c40dfde7","slug":"srimad-bhagwat-is-the-true-form-of-shri-krishna-and-radharani-acharya-dilip-shastri-varanasi-news-c-20-vns1021-1242964-2026-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण और राधारानी का साक्षात स्वरूप : आचार्य दिलीप शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण और राधारानी का साक्षात स्वरूप : आचार्य दिलीप शास्त्री
विज्ञापन
भारत भारती परिषद द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को अग्रवाल भवन, आस भैरव में व्यास पीठ से आचार्य दिलीप शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी का साक्षात स्वरूप है। महाप्रभु वल्लभाचार्य ने महादेव की नगरी काशी में पुष्टिमार्ग का केंद्र बनाकर संपूर्ण विश्व के जन-जन के कल्याण के लिए सुबोधिनी की रचना की थी।
उन्होंने कहा कि परिषद के संस्थापक सदस्य गोलोकवासी बलभद्रदास अग्रवाल ने राधारानी स्वरूपा गोस्वामी शरदवल्लभा बेटीजी की प्रेरणा से सुबोधिनी की सरल, सुबोध हिंदी भाषा में रचना की। व्यासपीठ ने कहा कि रास पंचाध्यायी भगवान श्रीकृष्ण का प्राण है और राधारानी भगवान की आत्मा हैं। श्रुतिरूपा, ऋषिरूपा एवं अग्नि कुमारिकाएं ही गोपियां हैं, जिनके साथ पूर्ण परब्रह्म परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला की थी। इसमें काशी विश्वनाथ भी गोपी का रूप धारण कर रासलीला में पधारे थे।
पं. अंबंज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की सेवा करना ही भक्तों का परम कर्तव्य है। मन और तन से प्राप्त धन को भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में समर्पित करने से ही मानसी सेवा जैसी परम सिद्धि प्राप्त हो सकती है। कथा श्रवण में अशोक वल्लभदास, पं. सिद्धनाथ पांडेय, पं. कमलेश त्रिपाठी, सत्येंद्र तिवारी, संतोष अग्रवाल, तेजबहादुर, राजीवन द्रविड, सचिन, पूजा, राजीव आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि परिषद के संस्थापक सदस्य गोलोकवासी बलभद्रदास अग्रवाल ने राधारानी स्वरूपा गोस्वामी शरदवल्लभा बेटीजी की प्रेरणा से सुबोधिनी की सरल, सुबोध हिंदी भाषा में रचना की। व्यासपीठ ने कहा कि रास पंचाध्यायी भगवान श्रीकृष्ण का प्राण है और राधारानी भगवान की आत्मा हैं। श्रुतिरूपा, ऋषिरूपा एवं अग्नि कुमारिकाएं ही गोपियां हैं, जिनके साथ पूर्ण परब्रह्म परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला की थी। इसमें काशी विश्वनाथ भी गोपी का रूप धारण कर रासलीला में पधारे थे।
विज्ञापन
पं. अंबंज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की सेवा करना ही भक्तों का परम कर्तव्य है। मन और तन से प्राप्त धन को भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में समर्पित करने से ही मानसी सेवा जैसी परम सिद्धि प्राप्त हो सकती है। कथा श्रवण में अशोक वल्लभदास, पं. सिद्धनाथ पांडेय, पं. कमलेश त्रिपाठी, सत्येंद्र तिवारी, संतोष अग्रवाल, तेजबहादुर, राजीवन द्रविड, सचिन, पूजा, राजीव आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन