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उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक रामसूत्र में पिरोएगी श्रीरामकथा, चैत्र नवरात्रि से होगा शुभारंभ

Mon, 05 Apr 2021 01:46 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 05 Apr 2021 01:46 AM IST
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Sri Ram Katha will be threaded in the Ramasutra from north to south India
भगवान श्री राम
हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता...। श्रीरामकथा भारतवर्ष यात्रा के जरिए भगवान श्रीराम की कथा को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। 108 श्रीराम कथाएं, पांच क्षेत्रीय बोली, सात भाषाओं में उत्तर से दक्षिण के दस राज्यों के 81 जनपदों सहित नेपाल और श्रीलंका को भी राम नाम के सूत्र में पिरोएगी।
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मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक मार्ग पर श्रीरामकथा का आयोजन किया जाएगा। श्रीराम कथा भारतवर्ष यात्रा उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, नेपाल से वापस उत्तर प्रदेश तत्पश्चात मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन दंडकारण्य), झारखंड, उड़ीसा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु से श्रीलंका तक जाएगी।
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युवा आध्यात्मिक वक्ता पं. आकाश पांडेय ने बताया कि संपूर्ण भारत के साथ ही नेपाल और श्रीलंका में भी प्रभु श्रीराम के प्रेम और करुणा की गंगा बहाएंगे। चैत्र नवरात्रि से श्रीरामकथा भारतवर्ष यात्रा का श्रीगणेश किया जाएगा। भगवान श्रीराम कथा भारतवर्ष यात्रा प्रभु श्रीराम के जीवनकाल की दो प्रमुख यात्राओं पर आधारित है। इसमें पहली जिसमें वे गुरु विश्वामित्र के साथ अयोध्या से जनकपुरी जाते हैं और दूसरी चौदह वर्ष के वनवास की यात्रा जो अयोध्या से लंका तक होती है।
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सीतापुर की धरती से होगा श्रीगणेश

पं. आकाश पांडेय ने बताया कि श्री रामायणम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री रामकथा भारतवर्ष का शुभारंभ 13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि से होगा। हिंदू नववर्ष से इस कथायात्रा का आरंभ संकल्प कथा के साथ पवित्र नैमिषारण्य सीतापुर की धरती से होगा। काशी में मंगलाचरण कथा 17 मई से आयोजित होगी। उसके बाद अयोध्या से रामकथा विभिन्न जनपदों से होती हुई जनकपुरी नेपाल तक जाएगी।

इस यात्रा संकल्प के पूर्ण होने के उपरांत कथा वापस अयोध्या से शुरू होकर प्रभु श्रीराम के वनगमन पथ की ओर प्रस्थान करेगी और लंका (श्रीलंका) तक चलेगी। वहां से वापस संकल्प भूमि नैमिषारण्य में कथा के संकल्प की पूर्णाहुति होगी। श्रीलंका से वापसी पर अयोध्या में सरयू तट पर भव्य राज्याभिषेक कथा 108वीं कथा के रूप में आयोजित होगी।

भारत की सात भाषाओं में होगी भगवान राम की कथा

आकाश पांडेय अनुज श्री के अनुसार कथा सिर्फ हिंदी में नहीं होगी बल्कि कथा को पांच क्षेत्रीय बोलियों अवधी, भोजपुरी, मैथिली, बुंदेलखंडी एवं छत्तीसगढ़ी में कहा जाएगा। इसके साथ ही सात भाषाओं हिंदी, उड़िया, तेलगू, मराठी, कन्नड़, अंग्रेजी एवं तमिल में भी कथा श्रवण कराने के लिए देशभर के विशिष्ट मानस वेत्ताओं को संस्था से जोड़ा जा रहा है।

जातीय समरसता का केंद्र बिंदु है राम कथा

अनुज श्री ने बताया कि भारतवर्ष विविधताओं से भरा हुआ है। इसमें जातीय संघर्ष की प्रवृत्ति रही है। उस संघर्ष को राम कथा के माध्यम से समाप्त करना ही इस कथा यात्रा का परम लक्ष्य है। राम को एकता का पर्याय बना कर जाति समरसता का केंद्र बिंदु बनाना है, ताकि भेदभाव मुक्त समाज की स्थापना हो सके।
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