बनारस में स्पीड ब्रीडिंग लैब: सतरंगी रोशनी में तैयार होंगे धान के उन्नत बीज, पीएम मोदी कर सकते हैं लोकार्पण
वाराणसी के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान में आधुनिक स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है। यह नासा की तकनीक से प्रेरित है। वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्नत धान की प्रजातियों पर जो शोध 12 साल में हो पाता था, उसमें अब सिर्फ छह साल लगेंगे।
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अगले दो माह बाद वाराणसी के चांदपुर स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) में धान की उन्नत प्रजाति के किस्मों पर शोध सतरंगी रोशनी में होंगे। इसके लिए इरी में तीन करोड़ रुपये की लागत से बीते सात माह में आधुनिक स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला का निर्माण किया गया है, जो नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की तकनीक से प्रेरित है। इस तकनीक का उपयोग अमेरिका के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में सब्जी उगाने के लिए किया था।
वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्नत और नई किस्म की प्रजातियों पर जो शोध 12 साल में हो पाता था, उसमें अब सिर्फ छह साल लगेंगे। इसका सीधा फायदा भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों को होगा। प्रयोगशाला का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। बिजली और पानी सप्लाई को लेकर कुछ तकनीकी काम बाकी है। जिसे अगले महीने तक पूरा कर लिया जाएगा।
खास बात यह है कि प्रयोगशाला का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते हैं। इरी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि धान की प्रजातियों के क्रास के बाद उन्नत किस्म और पोषक युक्त बीज के परीक्षण के लिए अब तक साल में एक से दो बार ही अनुकूल मौसम मिलता था। स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला बनने से पूरे साउथ एशिया के मौसम के अनुकूल धान के बीजों पर साल में छह बार शोध किया जा सकेगा।
दुनिया भर में धान की कई प्रजातियों पर शोध
इरी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि दुनिया भर में धान की कई प्रजातियों पर शोध चल रहा है। 50 प्रतिशत में तो इरी शोध कर रहा है। चावल को शुगर फ्री करने, प्रोटीन, जिंक, आयरन जैसे पोषक तत्वों में वृद्धि का शोध चल रहा है। इसे गति देने के लिए स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला को तैयार किया गया। निर्माण हो चुका है। फिनिशिंग चल रही है। अगले माह प्रधानमंत्री मोदी उद्घाटन कर सकते हैं।
17 हजार प्रजातियां रोपीं जाएंगी
स्पीड ब्रीडिंग प्रयोगशाला में बने दो बड़े और छह छोटे चेंबरों में क्रॉस की गई 17 हजार धान की प्रजातियों को रोपा जाएगा। जिनका विकास प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से तैयार रोशनी, हवा, पानी से किया जाएगा।
साधारण तौर पर पौधों के विकास में जिस तरह से सूरज की रोशनी में एक साथ सात रंग (लाल, हरा, नीला, पीला, बैगनी, आसमानी और नारंगी) खुली हवा, उमस, बारिश और बोरिंग के पानी का योगदान होता है। इसके विपरीत प्रयोगशाला में स्वीडन और जापान से लगाई गई एक से डेढ़ लाख रुपये की स्पेक्ट्रम लाइट (सतरंगी लाइट) के माध्यम से पौधों का विकास किया जाएगा।