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Varanasi News: आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए चलेंगी विशेष कक्षाएं
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मऊ। जिले में सात से 14 वर्ष के आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ा जाएगा। ऐसे बच्चों के लिए जिले के परिषदीय विद्यालयों में अलग से विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इस कार्य के लिए विशेष प्रशिक्षकों का चयन होगा। चयनित प्रशिक्षक इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय हैं। विभाग की तरफ से नामांकन के लिए शिक्षक डोर- टू-डोर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों का नाामांकन कराने के लिए प्रेरित करने में लगे हैं।
जिले भर में पहले ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल से बाहर हैं। इसके लिए शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की मदद ली जाएगी। गांव-गांव सर्वे कर यह पता लगाया जाएगा कि किन बच्चों ने अब तक स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है या किन छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। ताकि इनका नजदीकी परिषदीय विद्यालय में दाखिला कराया जाएगा।
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इन बच्चों को सामान्य कक्षाओं में सीधे बैठाने के बजाय उनकी शैक्षिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अलग से विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इसके लिए विशेष प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षक इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता आलोक कुमार सिंह ने बताया कि विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। विशेष अभियान के जरिये ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूलों तक लाने की कोशिश की जाएगी। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। संवाद
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जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय हैं। विभाग की तरफ से नामांकन के लिए शिक्षक डोर- टू-डोर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों का नाामांकन कराने के लिए प्रेरित करने में लगे हैं।
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जिले भर में पहले ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल से बाहर हैं। इसके लिए शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की मदद ली जाएगी। गांव-गांव सर्वे कर यह पता लगाया जाएगा कि किन बच्चों ने अब तक स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है या किन छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। ताकि इनका नजदीकी परिषदीय विद्यालय में दाखिला कराया जाएगा।
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इन बच्चों को सामान्य कक्षाओं में सीधे बैठाने के बजाय उनकी शैक्षिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अलग से विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इसके लिए विशेष प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षक इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता आलोक कुमार सिंह ने बताया कि विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। विशेष अभियान के जरिये ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूलों तक लाने की कोशिश की जाएगी। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। संवाद