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खास उपलब्धि: बनारस रेल इंजन कारखाना ने बनाया 1500वां विद्युत रेल इंजन, राष्ट्र को किया समर्पित

Thu, 08 Jun 2023 09:08 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 08 Jun 2023 09:08 PM IST
सार

बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) ने खास उपलब्धि हासिल की है। गुरुवार को बरेका ने 1500वां विद्युत रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित किया। बरेका में विद्युत रेल इंजनों के निर्माण का सिलसिला वर्ष 2016-17 से दो इंजनों के निर्माण से शुरू हुआ था।

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Special achievement to banaras locomotive works made 1500th electric Rail Engine
बरेका ने बनाया 1500वां विद्युत रेल इंजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में बने 1500वें रेल इंजन को गुरुवार को राष्ट्र को समर्पित किया गया। महाप्रबंधक बासुदेव पांडा ने बरेका कर्मशाला के न्यू लोको टेस्ट शॉप से हरी झंडी दिखाकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर शेड के लिए रवाना किया। बरेका में साल 2016 से विद्युत रेल इंजन का निर्माण हो रहा है।

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वर्तमान सत्र 2023-24 में 412 इंजन बनाने का लक्ष्य मिला है। अब तक 75 इंजन बनाए जा चुके हैं। महाप्रबंधक बासुदेव पांडा ने कर्मचारियों और अधिकारियों को बधाई दी और इस साल के लक्ष्य को समय से पूरा करने को कहा। इस दौरान प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर एसके श्रीवास्तव, प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक रजनीश गुप्ता, प्रमुख मुख्य इंजीनियर विनोद बमपाल, उप महाप्रबंधक विजय आदि मौजूद रहे। 
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दो इंजनों के निर्माण से शुरू हुआ था सिलसिला
बरेका में विद्युत रेल इंजनों के निर्माण का सिलसिला वर्ष 2016-17 से दो इंजनों के निर्माण से शुरू हुआ। इसके बाद सत्र 2017-18 में 25 विद्युत इंजन का निर्माण हुआ।
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वर्ष 2018-19 में 145, 2019-20 में 272, 2020-21 में 275 और 2021-22 में 383 इंजन बने। सत्र 2022-23 में 450 इंजन बनाने का लक्ष्य मिला था लेकिन इलेक्टि्रक चिप की आपूर्ति न होने से 363 इंजन ही बन पाए थे।

बरेका में बना है बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल ट्रेन का इंजन

बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त कोरोमंडल ट्रेन का इंजन वर्ष 2020 में बरेका ने बनाया था। इलेक्टि्रक इंजन की क्षमता छह हजार अश्व शक्ति की है। उप महाप्रबंधक विजय का दावा है कि इंजन का निर्माण अच्छा था, इसलिए पलटा नहीं। इंजन मालगाड़ी के डिब्बे पर चढ़ गया। अगर इंजन पलटता तो और बड़ा नुकसान हो सकता था। इंजन का वजन ज्यादा होता है। इसके पलटने के बाद आसपास की पटरियों से गुजरने वाली ट्रेनों को ज्यादा नुकसान पहुंचता। ज्यादा बोगियां क्षतिग्रस्त हो सकती थीं। इससे जनहानि बढ़ने का खतरा रहता।

उप महाप्रबंधक के मुताबिक सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) डिजाइन की बोगियां बनाई जा रही हैं। कोरोमंडल ट्रेन की बोगियां भी एलएचबी थीं। पहले आईसीएफ डिजाइन की बोगियां होती थीं, जो बहुत अच्छी नहीं मानी जाती थीं। 

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