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Varanasi News: यूपी टीम से खेलने 16 खिलाड़ी कर रहे विरोधी टीम के डी एरिया को ब्रेक करने का अभ्यास
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तमिलनाडु के कोयंबटूर में 28 जुलाई से शुरू होने वाली 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर पुरुष हॉकी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए काशी के 16 खिलाड़ी लगातार अभ्यास कर रहे हैं। वे विरोधी टीम के डी-एरिया को ब्रेक करने की रणनीति बनाने के साथ, फाउल बचाने और अपने स्टिक वर्क पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश टीम का चयन 5 जुलाई को लखनऊ के मो. शाहिद स्टेडियम गोमती नगर में होगा।
हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि चयन परीक्षण में वही खिलाड़ी भाग लेने के पात्र होंगे जिनका जन्म एक जनवरी 2007 या उसके बाद हुआ है। हॉकी वाराणसी के सचिव केबी रावत के अनुसार वर्तमान में 16 खिलाड़ी डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ा लालपुर में नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल चयन सूची में जगह बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना है।
वैज्ञानिक तरीके से दिया जा रहा प्रशिक्षण
केबी रावत ने बताया कि खिलाड़ियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह होती है कि उनका अधिकांश तकनीकी अभ्यास शाम के समय होता है, जबकि चयन परीक्षण प्रायः सुबह होते हैं। ऐसे में शरीर की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) के कारण प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखकर खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण के तहत सुबह के पहले सत्र में खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि दूसरे सत्र में खेल कौशल को निखारा जाता है। शाम को तकनीकी अभ्यास के साथ रिकवरी और बॉडी कूलिंग के सत्र भी होते हैं।
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हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि चयन परीक्षण में वही खिलाड़ी भाग लेने के पात्र होंगे जिनका जन्म एक जनवरी 2007 या उसके बाद हुआ है। हॉकी वाराणसी के सचिव केबी रावत के अनुसार वर्तमान में 16 खिलाड़ी डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ा लालपुर में नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल चयन सूची में जगह बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना है।
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वैज्ञानिक तरीके से दिया जा रहा प्रशिक्षण
केबी रावत ने बताया कि खिलाड़ियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह होती है कि उनका अधिकांश तकनीकी अभ्यास शाम के समय होता है, जबकि चयन परीक्षण प्रायः सुबह होते हैं। ऐसे में शरीर की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) के कारण प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखकर खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण के तहत सुबह के पहले सत्र में खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि दूसरे सत्र में खेल कौशल को निखारा जाता है। शाम को तकनीकी अभ्यास के साथ रिकवरी और बॉडी कूलिंग के सत्र भी होते हैं।
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