BHU में हस्ताक्षर अभियान: दुष्कर्म के दोषियों की रिहाई पर छात्रों में गुस्सा, CJI से फैसला वापस लेने की मांग
दुष्कर्म के दोषियों को जेल से रिहा करने के विरोध में बीएचयू के छात्रों ने बुधवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लिखकर दोषियों के रिहाई का फैसला वापस लेने की मांग की।
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गुजरात में दुष्कर्म पीड़िता के दोषियों को जेल से रिहा करने के विरोध में बुधवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के नाम पोस्टकार्ड लिखकर दोषियों के रिहाई का फैसला वापस लेने की मांग की।
बीएचयू विश्वनाथ मंदिर पर जॉइंट एक्शन कमेटी और दखल संगठन के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में सदस्यों ने बताया कि 27 फरवरी 2002 को गुजरात में साबरमती ट्रेन में आगजनी के बाद दंगे भड़क उठे थे। पुलिस और अन्य सरकारी मशीनरी कुछ कर नहीं पा रही थी। इस बीच तीन मार्च को पांच माह की गर्भवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
17 परिवार सदस्यों में से सात की हत्या की गई। मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 2008 में सभी 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा हुई। लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से इसी 15 अगस्त को सभी को जेल से छोड़ दिया गया। सदस्यों ने एक स्वर से सभी के रिहाई का फैसला वापस लेने की मांग की।
देवी-देवताओं पर टिप्पणी के विरोध में छात्रों ने फूंका पुतला
हिंदू देवी-देवताओं पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलीपुड़ी की टिप्पणी के विरोध में बीएचयू छात्रों ने सिंह द्वार पर प्रदर्शन कर कुलपति का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। इस दौरान पुलिस से छात्रों की नोंकझोंक भी हुई।
छात्रनेता अभिषेक सिंह ने कहा कि हिंदू देवी देवताओं पर जातिगत टिप्पणी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्र नेता शुभम शुभम तिवारी ने विरोध दर्ज करते हुए केंद्र सरकार से कुलपति की बर्खास्तगी का मांग की। इस दौरान सत्यवीर सिंह, कुलदीप तिवारी, अजय प्रताप सिंह, प्रशांत मिश्रा, आनंद मोहन झा, हिमांशु सिंह आदि दर्जनों छात्र मौजूद रहे।