राष्ट्रीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर को विशेष दर्जा देने के विरोध में हमेशा आवाज उठाते रहे। इस वजह से उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। डॉ. मुखर्जी बीएचयू के रजत जयंती समारोह में शामिल होने के साथ ही कई बार काशी आ चुके हैं। छह जुलाई यानी मंगलवार को उनकी जयंती है तो उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद करना भी जरूरी है।
कोलकाता में छह जुलाई 1901 को जन्में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन श्रीनगर में 23 जून 1953 को हुआ। 1951 को जनसंघ की स्थापना के बाद भी वे काशी आए। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पत्रकारिता एवं जनसंचार संस्थान के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कैबिनेट में श्यामा प्रसाद मुखर्जी वाणिज्य मंत्री भी रहे। उन्होंने न केवल कश्मीर की यात्रा की बल्कि कश्मीर में वह जेल में रहे और जेल में रहने के दौरान ही उनकी मौत हो गई। उनका केवल एक ही सपना था कि कश्मीर भारत का हिस्सा रहे और विशेष दर्जा समाप्त किया जाए। इसके लिए आवाज भी उठाई। आज वह हम सबके बीच नहीं है लेकिन सरकार ने उनके सपनों को साकार किया। यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। जनसंघ के संस्थापक के रूप में वह कई बार काशी आए और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। कोलकाता विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में भी उन्होंने जो कार्य किया, उसे आज भी लोग स्मरण करते हैं।