पहली बार होगा ऐसा: मुकदमे दर्ज हैं तो नहीं दे पाएंगे श्रीविंध्य पंडा समाज के चुनाव में वोट, पढ़ें- खास रिपोर्ट
Mirzapur News: श्रीविंध्य पंडा समाज का चुनाव सात साल बाद होने जा रहा है।1983 में विंध्य विकास परिषद बना था। अब इस चुनाव में वह लोग वोट नहीं दे पाएंगे जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
विस्तार
श्रीविंध्य पंडा समाज के चुनाव में वही लोग वोट डाल सकेंगे जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे नहीं दर्ज हैं। पहचान पत्र और सदस्य बनाने में भी मुकदमे को आधार बनाया जाएगा। ऐसा पहली बार होगा। जिला प्रशासन ने विंध्य विकास परिषद को 15 दिन में पहचान पत्र बनाने की जिम्मेदारी द है। अब मतदाताओं से फॉर्म के साथ शपथपत्र भरवाए जा रहे हैं। इसमें मुकदमे की जानकारी मांगी गई है।
प्रशासन ने इसके पीछे 1983 की नियमावली को आधार बनाया है। इसमें कहा गया कि साफ-सुथरी छवि के लोग ही सदस्य बन सकते हैं। विंध्य विकास परिषद की अध्यक्ष और मिर्जापुर की जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन कहती हैं, चुनाव प्रक्रिया में नियमावली का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। कोई परंपरा नई नहीं है। परिचय पत्र वाले ही मतदान कर सकेंगे। प्रशासन के इस फैसले की चर्चा विंध्याचल समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी है क्योंकि यह अपनी तरह का पहला चुनाव है जिसमें आपराधिक छवि के लोग वोट नहीं डाल पाएंगे।
श्री विंध्य पंडा समाज का गठन 1953 में हुआ था। इसमें तीर्थ पुरोहित, पारीवाल के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सिटी मजिस्ट्रेट को शामिल किया गया। 1983 में विंध्य विकास परिषद की स्थापना हुई। दोनों ही संगठनों में 19-19 लोग होते हैं। विंध्य पंडा समाज में सभी 19 लोग पंडा समाज के होते हैं। विंध्य विकास परिषद के 19 लोगों में पांच चुनकर आते हैं। तीन पंडा समाज के पदेन होते हैं। 2 मनोनीत, सात लोग प्रशासन के होते हैं। दो को डीएम पदेन चुनते हैं। परिषद के अध्यक्ष डीएम होते हैं।
सात साल बाद हो रहा चुनाव
यह चुनाव सात साल बाद हो रहा है। इससे पहले साल 2018 में पंकज द्विवेदी विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष चुने गए थे। उनका कार्यकाल साल 2020 तक था। कोरोना की वजह से विंध्य पंडा समाज का चुनाव प्रशासन ने नहीं कराया था। साल 2023 में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को डीएम के पास बात रखने को कहा था।
तो 50 फीसदी रह जाएगी संख्या
विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी कहते हैं, इस फैसले पर विचार करना चाहिए। ऐसे तो बड़ी संख्या में लोग मतदान से वंचित हो जाएंगे। मामले में डीएम से मुलाकात की जाएगी। विंध्य पंडा समाज के 1200 से ज्यादा तीर्थ पुरोहित पहचान पत्र पाने का अधिकार मानते हैं। अगर प्रशासन अपने फैसले पर टिका रहा तो संख्या घटकर पचास फीसदी के आसपास हो जाएगी।
बदलाव का ये दावा
- 75 साल से विंध्य पंडा समाज का दबदबा है। इस बीच दर्शनार्थियों से विवाद, मारपीट के मामले सामने आए।मंदिर की छवि न बिगड़े और बेहतर सुविधा मिले, इसलिए प्रशासन चुनाव को साफ-सुथरे तरीके से कराना चाहता है।
- विंध्य कॉरिडोर बड़ा प्रोजेक्ट है। देश-विदेश से लोग यहां आते हैं। सभी तरह की सुविधा और सुरक्षा लोगों को मिल सके, यही मंशा प्रशासन की है।
- विंध्य कॉरिडोर के फेज वन का काम पूरा कर लिया गया है। अब फेज टू का काम शुरू होना है। इसके तहत विंध्याचल मंदिर के आसपास और जमीन अधिग्रहीत की जानी है। रिंग रोड का निर्माण होना है। प्रशासन चाहता है कि इसमें कोई अड़चन न आए।