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लघु फिल्म देगी बड़ा सामाजिक संदेश
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 08 Jul 2015 02:13 AM IST
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वाराणसी। जातिवाद और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर वैसे तो पहले भी कई फिल्में बन चुकी हैं मगर युवा फिल्म निर्माता मयंक बोकोलिया का दावा है कि काशी को पृष्ठभूमि में रखकर बन रही उनकी लघु फिल्म ‘आधा चांद तुम रख लो’ लीक से हटकर होगी। इस फिल्म में दुनिया के सबसे पुराने जीवंत शहर की सामाजिक विषमताओं को बखूबी सेल्यूलाइड पर उतारने की तैयारी है। फिल्म की पटकथा तैयार है। शूटिंग 11 जुलाई से शुरू होगी।
नेशनल चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी की मदद से बन रही इस लघु फिल्म की पटकथा भी युवा निर्माता व सामाजिक कार्यकर्ता मयंक ने ही लिखी है। जबकि फिल्म के सह निर्देशक राजेश कुमार सिंह बनारस के रहने वाले हैं। अस्सी के रहने वाले राजेश बीएचयू के दृश्य कला संकाय के पूर्व छात्र हैं। मयंक ‘द लॉस्ट बहुरूपिया’ की प्रोडक्शन टीम के भी सदस्य रहे। इस कलात्मक फिल्म को पिछले साल नेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत किया गया था। बतौर निर्देशक ‘आधा चांद तुम रख लो’ मयंक की पहली फिल्म है। वहीं राजेश ने पिछले साल लघु फिल्म ‘जोगी’ का निर्देशन किया था।
अलग-अलग मजहब के दो दोस्तों की कहानी
सह निर्माता राजेश बताते हैं, ‘आधा चांद तुम रख लो’ अलग-अलग मजहब के दो बच्चों जीतू और फिरोज की कहानी है। दोनों अच्छे दोस्त हैं। दोनों गंगा में सिक्के खोजते हैं और उसी पैसे से अपने घर का खर्च चलाते हैं। गहरे दोस्त होने के बाद भी दोनों जातिवाद और छूआछूत के शिकार हो जाते हैं। मयंक ने बताया कि जीतू का किरदार दिल्ली का एक बच्चा निभा रहा है, जिसे दिल्ली के एक एनजीओ ‘जमघट’ ने गोद लिया है। वहीं फिरोज का किरदार अस्सी घाट पर एक चाय की दूकान पर काम करने वाला बच्चा निभा रहा है। दोनों ने
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ही अभिनय का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है। फिल्म के प्रोडक्शन से जुड़े लोग ही उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। बताया कि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा गंगा घाटों पर फिल्माया जाएगा। 18 जुलाई तक फिल्मांकन पूरा कर लिया जाएगा। जिससे अगस्त में होने वाले पराग फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को शामिल कराया जा सकें। मयंक ने कहा कि उम्मीद है कि यह छोटी सी फिल्म बड़ा सामाजिक संदेश देने में कामयाब होगी।
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नेशनल चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी की मदद से बन रही इस लघु फिल्म की पटकथा भी युवा निर्माता व सामाजिक कार्यकर्ता मयंक ने ही लिखी है। जबकि फिल्म के सह निर्देशक राजेश कुमार सिंह बनारस के रहने वाले हैं। अस्सी के रहने वाले राजेश बीएचयू के दृश्य कला संकाय के पूर्व छात्र हैं। मयंक ‘द लॉस्ट बहुरूपिया’ की प्रोडक्शन टीम के भी सदस्य रहे। इस कलात्मक फिल्म को पिछले साल नेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत किया गया था। बतौर निर्देशक ‘आधा चांद तुम रख लो’ मयंक की पहली फिल्म है। वहीं राजेश ने पिछले साल लघु फिल्म ‘जोगी’ का निर्देशन किया था।
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अलग-अलग मजहब के दो दोस्तों की कहानी
सह निर्माता राजेश बताते हैं, ‘आधा चांद तुम रख लो’ अलग-अलग मजहब के दो बच्चों जीतू और फिरोज की कहानी है। दोनों अच्छे दोस्त हैं। दोनों गंगा में सिक्के खोजते हैं और उसी पैसे से अपने घर का खर्च चलाते हैं। गहरे दोस्त होने के बाद भी दोनों जातिवाद और छूआछूत के शिकार हो जाते हैं। मयंक ने बताया कि जीतू का किरदार दिल्ली का एक बच्चा निभा रहा है, जिसे दिल्ली के एक एनजीओ ‘जमघट’ ने गोद लिया है। वहीं फिरोज का किरदार अस्सी घाट पर एक चाय की दूकान पर काम करने वाला बच्चा निभा रहा है। दोनों ने
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ही अभिनय का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है। फिल्म के प्रोडक्शन से जुड़े लोग ही उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। बताया कि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा गंगा घाटों पर फिल्माया जाएगा। 18 जुलाई तक फिल्मांकन पूरा कर लिया जाएगा। जिससे अगस्त में होने वाले पराग फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को शामिल कराया जा सकें। मयंक ने कहा कि उम्मीद है कि यह छोटी सी फिल्म बड़ा सामाजिक संदेश देने में कामयाब होगी।