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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Shivputri Narmada met Kashi Vishwanath Saint Suman reached Dham pilgrimage on foot to twelve Jyotirlingas

UP: काशी विश्वनाथ से मिलीं शिवपुत्री नर्मदा, धाम पहुंचीं संत सुमन; 12 ज्योतिर्लिंगों की कर रहीं पद यात्रा

Fri, 14 Nov 2025 05:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 14 Nov 2025 05:56 PM IST
सार

Varanasi News: काशी विश्वनाथ धाम में संत माता सुमन गिरी का स्वागत किया गया। वे बारह ज्योतिर्लिंगों की पावन यात्रा पर निकलीं हैं। मंदिर परिसर में नर्मदा के जल से उन्होंने बाबा का विधि-विधान से अभिषेक किया।

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Shivputri Narmada met Kashi Vishwanath Saint Suman reached Dham pilgrimage on foot to twelve Jyotirlingas
बाबा विश्वनाथ धाम में संत सुमन। - फोटो : संवाद

विस्तार

शुक्रवार को संत माता सुमन गिरी अपनी बारह ज्योतिर्लिंग पद यात्रा के अभियान में शुक्रवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचीं। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। यह अवसर अत्यंत विशेष रहा, क्योंकि मां नर्मदा भगवान शिव की पुत्री हैं, अतः उनके जल से किया गया अभिषेक धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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माता सुमन गिरी अपनी पद यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलती हैं। यात्रा के क्रम में वे प्रत्येक दिन मार्ग में किसी एक श्रद्धालु के घर में रात्रि विश्राम करती हैं। वहीं पर ध्यान, पूजन और भोजन की व्यवस्था होती है। इसके बाद वे कुटुंब प्रबोधन एवं सामाजिक समरसता पर आधारित संवाद व बैठक आयोजित करती हैं, जिससे समाज में एकता, श्रद्धा और सद्भाव का संदेश प्रसारित हो रहा है।
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उनकी यह पद यात्रा न केवल धार्मिक जागरण का अभियान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, साधना और सामाजिक समरसता के पुनर्स्थापन का एक सबल प्रयास भी है। विशेष रूप से आज विश्वनाथ धाम में भगवान विश्वेश्वर का मां नर्मदा के जल से किया गया अभिषेक धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व आयोजन है। इसके साथ ही यह पिता-पुत्री के परस्पर स्नेह एवं भारतीय सनातन मानस में इस पवित्र संबंध की स्थायी स्मृति अंकित करने वाला अनुष्ठान भी है।
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बतादें कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने कुछ माह पूर्व ही रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग धाम से परस्पर तीर्थ जल के आदान-प्रदान का नवाचार प्रारंभ किया है। इस नवाचार के अंतर्गत त्रिवेणी संगम प्रयागराज से गंगाजल ले कर भगवान विश्वनाथ के अवलोकनोपरांत रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग अभिषेक हेतु प्रेषित तथा रामेश्वरम से कोडि तीर्थम सागर जल भगवान विश्वनाथ के अभिषेक हेतु प्राप्त किया जाता है।

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