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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Shivanand Baba said in Varanasi: Getting Padma Shri is the honor of the whole yoga world, it is the reward of my 126 years of sadhana.

शिवानंद बाबा बोले: पद्मश्री मिलना पूरे योग जगत का सम्मान, यह मेरी 126 साल की साधना का प्रतिफल है

Thu, 24 Mar 2022 09:57 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 24 Mar 2022 09:57 AM IST
सार

बाबा अपने आश्रम में तीसरे मंजिल पर एक कमरे में रहते हैं। भक्तों से मिलने के लिए वे अकसर नीचे आया करते हैं। वे बिना किसी सहारे के 35 सीढ़ियां चढ़ते एवं उतरते हैं।

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Shivanand Baba said in Varanasi: Getting Padma Shri is the honor of the whole yoga world, it is the reward of my 126 years of sadhana.
संयम, योग और सादगी के मिशाल हैं बाबा शिवानंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित 126 साल के शिवानंद बाबा बुधवार को वाराणसी पहुंचे। दुर्गाकुंड में अपने आश्रम में पहुंचने के बाद बाबा ने थोड़ी देर विश्राम किया। बाबा शिवानंद ने कहा कि सरकार ने यह सम्मान केवल मुझे ही नहीं बल्कि पूरे योग जगत को दिया है। यह मेरी 126 साल की साधना का प्रतिफल है।

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उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने वहां उपस्थित लोगों से कहा कि बाबा तीन शताब्दी के साक्षी हैं। उन्होंने योग के माध्यम से जीवन जीने की तरीकों को बदला है। बाबा ने राष्ट्रपति से हुई बात में कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मेरा हालचाल पूछा।  उन्होंने कहा कि मोदी देश के ही नहीं पूरे विश्व के नेता हैं। प्रधानमंत्री ने पूरे विश्व को बताया है कि योग करने से अपने जीवन जीने की शैली को बदल सकते हैं।

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अब भी चढ़ते हैं 35 सीढ़ियां

बाबा अपने आश्रम में तीसरे मंजिल पर एक कमरे में रहते हैं। कमरे तक जाने में उन्हें 35 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।  भक्तों से मिलने के लिए वे अकसर नीचे आया करते हैं। वे बिना किसी सहारे के 35 सीढ़ियां चढ़ते एवं उतरते हैं। बाबा के शिष्य संजय ने बताया कि बाबा की इतनी ऊर्जा देख हम दंग रह जाते हैं। 

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पढ़ेंः 126 साल के बाबा शिवानंद को पद्मश्री: भूख के चलते माता-पिता और बहन की हुई थी मौत, 6 साल की उम्र से शुरू किया योग

1979 में पहली बार वाराणसी आए

Shivanand Baba said in Varanasi: Getting Padma Shri is the honor of the whole yoga world, it is the reward of my 126 years of sadhana.
बाबा शिवानंद - फोटो : अमर उजाला

शिवानंद बाबा 1979 में वाराणसी आए। इससे पहले वे कमाख्या (असम), डिब्रुगढ़ फिर वृंदावन रहे। उसके बाद वहां से वाराणसी आए, तब से यहीं रह रहे है। यहीं से सभी जगहों के आश्रमों पर अपने शिष्यों से मिलने जाते हैं। बाबा ने बताया कि 1979 से लेकर 84 तक भेलूपुर पानी टंकी के पास एवं खोजवा स्थित संकुल धारा पोखरा के पास किराये के कमरे में रहे। उसके बाद दुर्गाकुंड स्थित आश्रम पर आए।

दो शिष्याएं हमेशा रहतीं हैं साथ

Shivanand Baba said in Varanasi: Getting Padma Shri is the honor of the whole yoga world, it is the reward of my 126 years of sadhana.
योग करते बाबा शिवानंद। - फोटो : अमर उजाला

डिब्रुगढ़ की रहने वाली शिप्रा (62 वर्ष) बताती हैं कि वह दस साल की उम्र से ही बाबा के साथ रह रही हैं। शिप्रा ने कहा कि बाबा को पहली बार देख कर लगा कि इनसे मेरा पूर्व जन्म से ही नाता है। 52 साल हो गए अपने घर नहीं गई। घरवालों एवं रिश्तेदारों से कभी-कभी बात हो पाती है।

25 साल से बाबा के साथ हैं

वहीं, गुवाहाटी की रहने वाली आदर नाथ (65 वर्ष) बताती हैं कि पति के देहांत के बाद पिछले 25 साल से बाबा के साथ हूं। दो बेटे थे जो अब नहीं रहे एक बेटी है जो अपने पति के साथ कोलकाता में रहती है। बाबा के साथ रहने के बाद ऐसा लगता है जैसे अब किसी भी चीज की कामना नहीं है।

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