126 साल की उम्र में पद्मश्री सम्मान पाने वाले काशी के बाबा शिवानंद की फुर्ती ऐसी कि देखने वाले दंग रह जाएं। वाराणसी के दुर्गाकुंड इलाके में स्थित आश्रम में तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में निवास करने वाले बाबा शिवानंद दिन में तीन से चार बार बिना किसी सहारे के सीढ़ियां चढ़ते और उतरते हैं।
चार वर्ष की उम्र में अपने परिवार से अलग हो गए बाबा शिवानंद ने छह वर्ष की उम्र से ही योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया। तब से ही उन्होंने पवित्र जीवन जीने की ठानी, वह भी बिल्कुल सामान्य वेशभूषा में और आज तक उसका पालन करते हैं।
बाबा ने बताया कि उनके माता-पिता भीख मांगकर गुजारा करते थे। चार साल की उम्र में माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया। शिवानंद छह साल के थे, तभी उनके माता-पिता और बहन का भूख के चलते निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने काशी में गुरु के सानिध्य में आध्यात्म की दीक्षा लेनी शुरू की। नीचे की स्लाइड्स में देखें...
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संयम, योग और सादगी के मिशाल हैं बाबा शिवानंद
- फोटो : अमर उजाला
126 साल के बाबा शिवानंद के बारे में शिष्यों का दावा है कि वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग इंसान हैं। उनके आधार कार्ड और पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि आठ अगस्त 1896 दर्ज है। इस रिकार्ड को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने की भी कवायद की जा रही है।
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संयम, योग और सादगी के मिशाल हैं बाबा शिवानंद
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राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित समारोह में पद्म सम्मान के लिए अपने नाम की घोषणा सुनने के बाद अपने स्थान से खड़े हुए बाबा शिवानंद ने राष्ट्रपति के पास पहुंचने तक तीन बार नंदीवत योग की मुद्रा में प्रणाम कर दुनिया का मन मोह लिया। पहले पीएम के सामने दोनों पैर मोड़कर हाथों को आगे कर प्रणाम किया तो पीएम मोदी ने भी झुककर उनका अभिवादन किया।
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संयम, योग और सादगी के मिशाल हैं बाबा शिवानंद
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इसके बाद राष्ट्रपति के सामने पहुंचने पर उन्होंने इसी मुद्रा में प्रणाम किया और पास पहुंचने के बाद फिर झुके तो राष्ट्रपति ने उन्हें आगे बढ़कर सहारा दिया। इस घटनाक्रम के जरिए भी बाबा ने योग कला को दुनिया के सामने रखा।
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बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को अविभाजित बंगाल के श्रीहट्ट जिले के ग्राम हरिपुर (थाना क्षेत्र बाहुबल) में एक गोस्वामी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मौजूदा समय में यह जगह बांग्लादेश में है। जीवन के 126 वसंत देख चुके बाबा शिवानंद छह वर्ष की आयु से ही संयमित दिनचर्या का पालन कर रहे हैं। पूरी तरह स्वस्थ बाबा ब्रह्म मुहूर्त में तीन बजे ही चारपाई छोड़ देते हैं।