कमिश्नर को खत लिख शिवभक्तों ने बताया अपना कष्ट, बोले- मांगें ना पूरी होने पर करेंगे आंदोलन
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काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई व्यवस्था से बाबा के भक्त आहत हैं। मंदिर में कई सालों से दैनिक दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी सावन के महीने में बाबा विश्वनाथ के दर्शन और स्पर्श से दूर कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं ने इस मामले में मंडलायुक्त और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र लिखकर इस व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर निर्णय में बदलाव नहीं किया तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। साथ ही गर्भगृह के बाहर लगे पात्र को हटाने की मांग की।
बाबा के दर्शन और स्पर्श की मांग करने वालों का कहना है कि सावन में केवल सोमवार को झांकी दर्शन और स्टैंड के माध्यम से जलाभिषेक की व्यवस्था की गई थी बाकी दिनों में गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति थी। बाद में मंदिर प्रशासन ने इस व्यवस्था को पूरे महीने के लिए लागू कर दिया। मंदिर में सैकड़ों की संख्या में दैनिक दर्शनार्थी हैं। इसमें से अधिकतर के पास मंदिर द्वारा जारी दैनिक कार्ड हैं।
भक्तगण रोजाना सुबह 3:30 बजे भगवान ढुंढिराज गणेश का प्रात: कालीन आरती कर विश्वनाथ मंदिर के कपाट खुलने की उम्मीद में बैठते हैं कि बाबा का दर्शन और स्पर्श का सौभाग्य प्राप्त होगा। यह परंपरा पिछले कई सालों से नियमित रूप से चलती आ रही है। प्रात:कालीन दर्शनार्थी इसी उम्मीद के साथ बिना मौसम की परवाह किए आते हैं।
उन्होंने मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल से मिलकर अपनी पीड़ा बताई और व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि सावन के बचे तीन सोमवार और विशेष पर्व को छोड़कर अन्य दिनों में प्रात:कालीन शिव लिंग स्पर्श की व्यवस्था को चालू कराने की मांग की है। मंडलायुक्त को पत्र भेजने वालों में देवकीनंदन कपूर, केदारनाथ शर्मा, बृजेश मौर्य, विशाल उपाध्याय, मनोज उपाध्याय, सविता, गुंजन नंदा, दीपक सिंह, एसके वर्मा, चंद्रभूषण शुक्ला, अनिल कुमार श्रीवास्तव, बीएल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।