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सेना भर्ती की सूची से शास्त्री बाहर, काशी में आक्रोश
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सेना की भर्ती परीक्षा से संस्कृत विश्वविद्यालयों को बाहर किए जाने से काशी के विद्वत समाज और छात्रों में आक्रोश है। छात्रों ने जहां आंदोलन की चेतावनी दी है वहीं श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद, श्री काशी विद्वत परिषद और अखिल भारतीय संत समिति के विद्वतजनों ने ऐतराज जताया है। विद्वानों ने छात्रों के समर्थन में सरकार से इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि सेना की ओर से शास्त्री उपाधि धारकों को अमान्य करार देना ठीक नहीं है। इससे छात्रों का मनोबल कम होगा। इस मामले में केंद्र सरकार को संस्कृत व छात्रहित में सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संस्कृत भारत की पहचान है। सेना की ओर से शास्त्री उपाधि धारकों को वंचित किया जाना अनुचित है।
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के साथ यह अन्याय है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में देश भर के 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है। सेना भर्ती निदेशालय को भी पत्र भेजकर हमने अपनी बात रखी है।
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क्या है मामला
सेना में धर्म गुरु पद के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय समेत देश भर के 18 संस्कृत विश्वविद्यालय की शास्त्री डिग्री को स्नातक के समकक्ष नहीं माना है। सेना भर्ती महानिदेशालय बी (ए) की ओर जारी योग्यता निर्धारण की सूची में देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों के छात्रों को बाहर बाहर कर दिया है। वहीं बंगलूरू, चेन्नई, दानापुर, जबलपुर, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, पुणे, शिलांग, नेपाल, दिल्ली सहित अन्य जोनों के माध्यमिक विद्यालयों के नाम हैं जबकि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मध्यमा स्तर का नाम गायब है।
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श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि सेना की ओर से शास्त्री उपाधि धारकों को अमान्य करार देना ठीक नहीं है। इससे छात्रों का मनोबल कम होगा। इस मामले में केंद्र सरकार को संस्कृत व छात्रहित में सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संस्कृत भारत की पहचान है। सेना की ओर से शास्त्री उपाधि धारकों को वंचित किया जाना अनुचित है।
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काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के साथ यह अन्याय है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में देश भर के 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है। सेना भर्ती निदेशालय को भी पत्र भेजकर हमने अपनी बात रखी है।
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क्या है मामला
सेना में धर्म गुरु पद के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय समेत देश भर के 18 संस्कृत विश्वविद्यालय की शास्त्री डिग्री को स्नातक के समकक्ष नहीं माना है। सेना भर्ती महानिदेशालय बी (ए) की ओर जारी योग्यता निर्धारण की सूची में देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों के छात्रों को बाहर बाहर कर दिया है। वहीं बंगलूरू, चेन्नई, दानापुर, जबलपुर, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, पुणे, शिलांग, नेपाल, दिल्ली सहित अन्य जोनों के माध्यमिक विद्यालयों के नाम हैं जबकि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मध्यमा स्तर का नाम गायब है।