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प्रधानमंत्री बनने के बाद एक ही बार काशी आए थे शास्त्री जी

Tue, 11 Jan 2022 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jan 2022 12:48 AM IST
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Shastri ji came to Kashi only once after becoming the Prime Minister
पांच साल तक प्रधानमंत्री रहे स्व. लाल बहादुर शास्त्री का घर आज भी रामनगर में उस दौर की स्वच्छ और ईमानदार राजनीति की कहानी कहता है। संस्कृति मंत्रालय ने मिट्टी के घर को म्यूजियम के रूप में तब्दील कर दिया। संग्रहालय के पहले कमरे में तैयार वॉर रूम में चीन और पाकिस्तान के युद्ध की दुर्लभ तस्वीरें लगाई गई हैं। शास्त्रीजी के रसोईघर और बैठक को भी उसी समय का लुक दिया गया है।
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इसमें दो अक्टूबर 1904 को पूर्व पीएम के जन्म से लेकर 12 जनवरी 1966 को नई दिल्ली में विजय घाट पर अंत्येष्टि तक के बारे में जानकारी दी गई है। पूर्व पीएम की स्मृतियों से जुड़े 150 से अधिक चित्र लगाए गए हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि काशी के लाल व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री सादगी की मिसाल थे। रामनगर में स्थित उनका पैतृक आवास हर किसी को अपनी जुबानी उनकी सादगी की कहानी सुनाता है। पीएम बनने के बाद सिर्फ एक बार ही वह काशी आए थे और ढाई घंटे का समय अपने आवास पर बिताया था।
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1965 में पीएम बनने के बाद जब शास्त्री जी घर आए थे तो सुबह से ही पुलिस का पहरा रामनगर में लग गया था। चौक पर काफिला रुका और शास्त्री जी अंगरक्षकों को रोक कर सीधे सबसे पहले किले में काशीनरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह से मिलने पहुंचे। वहां से पैदल ही गली से होकर घर आए थे। उस दिन वे ढाई घंटे घर में रहे। फिर कभी नहीं आ सके। 11 जनवरी 1969 को उनके हमेशा के लिए इस दुनिया से चले जाने की खबर आई।
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पारिवारिक पेंशन से किया किस्तों का भुगतान
बच्चों के आग्रह पर प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने एक फिएट कार बैंक लोन से खरीदी थी। किस्तों की अदायगी के पूर्व उनका निधन हो गया। बैंक अधिकारियों ने ललिता शास्त्री से किस्त माफ करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। भारत के लाल की ललिता ने सच्ची अर्धांगिनी के रूप में न केवल लौकिक जीवन में उनका ख्याल रखा बल्कि पारलौकिक जीवन में शास्त्री जी के स्वाभिमानी आत्मा पर आंच नहीं आने दी। अपने पारिवारिक पेंशन से कार के बची किस्तों का भुगतान किया।
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