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शारदीय नवरात्र: चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में पधारेंगी मां दुर्गा, कलश स्थापना के लिए 47 मिनट का मुहूर्त
Sat, 10 Oct 2026 10:26 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 10 Oct 2026 10:26 AM IST
सार
शारदीय नवरात्र में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में मां दुर्गा पधारेंगी। कलश स्थापना के लिए 47 मिनट का मुहूर्त है। शिव की नगरी में कल से नौ दिनों तक शक्ति की आराधना होगी। मंदिरों में तैयारियां पूरी हो गई है।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
विस्तार
काशी में रविवार से शारदीय परंपरा के अनुसार शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान के दौरान देवाधिदेव महादेव की नगरी में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना होगी। काशी में रविवार से घरों में कलश स्थापना हो जाएगी।
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य सुभाष पांडेय के मुताबिक, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। इस बार प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग का संयोग है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, घरों में घट स्थापना के लिए 11 अक्तूबर को सुबह 11:20 मिनट से 12:07 बजे तक 47 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
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बीएचयू के ज्योतिषाचार्य सुभाष पांडेय के मुताबिक, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। इस बार प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग का संयोग है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, घरों में घट स्थापना के लिए 11 अक्तूबर को सुबह 11:20 मिनट से 12:07 बजे तक 47 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
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प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, मूर्ति स्थापना के लिए बिल्व वृक्ष के पास देवी को निमंत्रण 16 अक्तूबर को और पत्रिका प्रवेशन, सरस्वती पूजा और मूर्ति स्थापना 17 अक्तूबर को किया जाएगा। महाअष्टमी व्रत एवं रात्रि में महानिशा पूजन 18 अक्तूबर को होगी।
महानवमी का व्रत 19 अक्तूबर को और इसी दिन सुबह 7:40 के बाद दुर्गा पाठ/पूजन का होम भी आरंभ हो जाएगा जो 20 अक्तूबर को सुबह 9:20 बजे तक किया जा सकेगा। पूर्ण नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग 21 अक्तूबर की सुबह पारण करेंगे। देवी दुर्गा का घट/ प्रतिमा आदि से विसर्जन 20 अक्तूबर को और भगवती की प्रतिमा का उत्थापन और विसर्जन 21 अक्तूबर को होगा।
महानवमी का व्रत 19 अक्तूबर को और इसी दिन सुबह 7:40 के बाद दुर्गा पाठ/पूजन का होम भी आरंभ हो जाएगा जो 20 अक्तूबर को सुबह 9:20 बजे तक किया जा सकेगा। पूर्ण नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग 21 अक्तूबर की सुबह पारण करेंगे। देवी दुर्गा का घट/ प्रतिमा आदि से विसर्जन 20 अक्तूबर को और भगवती की प्रतिमा का उत्थापन और विसर्जन 21 अक्तूबर को होगा।
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काशी में नौ दिनों तक इन मंदिरों में होगी मां की आराधना
- प्रथम - मां शैलपुत्री (अलईपुर): नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री के दर्शन का विधान है। इनका प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर वरुणा नदी के समीप अलईपुर (सिटी स्टेशन के पास) स्थित है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
- द्वितीय - मां ब्रह्मचारिणी (दुर्गा घाट): दूसरे दिन भक्त ब्रह्मचारिणी माता के दरबार में शीश नवाते हैं। यह मंदिर दुर्गा घाट पर स्थित है। माता का यह स्वरूप कठोर तपस्या और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
- तृतीय - मां चंद्रघंटा (चौक): तृतीय तिथि पर पूजित चंद्रघंटा देवी का मंदिर चौक क्षेत्र के सूतटोला (गोविंदपुरा गली) में स्थित है। मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने वाली यह देवी भक्तों के समस्त कष्टों का हरण करती हैं।
- चतुर्थ - मां कूष्मांडा (दुर्गाकुंड): चौथे दिन का पूजन काशी के सुप्रसिद्ध दुर्गाकुंड स्थित लाल पत्थर के दुर्गा मंदिर में होता है। मान्यता है कि मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कूष्मांडा यहां जागृत स्वरूप में विराजमान हैं।
- पंचम - मां स्कंदमाता (जैतपुरा): पांचवें दिन जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर परिसर में मां स्कंदमाता का दर्शन-पूजन किया जाता है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने से इनका नाम स्कंदमाता पड़ा।
- षष्ठी - मां कात्यायनी (सिंधिया घाट): छठे दिन महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट मां कात्यायनी की पूजा होती है। इनका मंदिर सिंधिया घाट (आत्मावीरेश्वर मंदिर के पास) स्थित है।
- सप्तमी - मां कालरात्रि (कालिका गली): सातवें दिन असुरों का संहार करने वाली महाशक्ति कालरात्रि का दर्शन होता है। इनका मंदिर गोदौलिया-चौक मार्ग पर कालिका गली में स्थित है।
- अष्टमी - मां महागौरी (अन्नपूर्णा मंदिर, विश्वनाथ गली): दुर्गाष्टमी पर मां महागौरी के दर्शन का विधान है। काशी में काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा को ही महागौरी का मुख्य स्वरूप माना जाता है।
- नवमी - मां सिद्धिदात्री (मैदागिन): नवरात्र के अंतिम दिन समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इनका मंदिर मैदागिन स्थित कालभैरव क्षेत्र के पास गोलघर (सिद्धिमाता गली) में स्थित है।