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Swami Swaroopanand Death: टूट गई धर्मसम्राट के शिष्य परंपरा की कड़ी, सनातन धर्म के ध्वजवाहक थे शंकराचार्य

Sun, 11 Sep 2022 10:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 11 Sep 2022 10:58 PM IST
सार

नौ साल की उम्र में ही बनारस आने वाले शंकराचार्य का काशी से गहरा नाता था। शंकराचार्य के शिवसायुज्य की प्राप्ति की सूचना से काशी की धर्मपरायण जनता और संत समाज में भी शोक की लहर है।

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Shankaracharya  Swami Swaroopanand Death chain of disciple tradition of emperor broken
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (बायें) - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिवसायुज्य की प्राप्ति की सूचना से काशी की धर्मपरायण जनता और संत समाज में भी शोक की लहर है। केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में भी बटुक व शिष्यों ने शोक जताया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के ब्रम्हलीन होने की सूचना मिलते ही दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल में शोक की लहर दौड़ गई।

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धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की शिष्य परंपरा के अंतिम संत थे, उनके जाने से यह कड़ी टूट गई। धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने भी दुख प्रकट किया।
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सनातन संस्कृति को अपूरणीय क्षति 
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का भौतिक शरीर पूर्ण होने पर श्रीकाशी विद्वत परिषद ने शोक जताया। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म के अग्रणी आचार्य के गोलोकवासी होने से अपूरणीय क्षति सनातन संस्कृति को हुई है। समय-समय पर शंकराचार्य मुखर होकर सनातन संस्कृति तथा वैदिक एवं धर्म शास्त्रों के पक्षों को रखते थे। इस महान विभूति के न रहने से भारतीय सनातन संस्कृति के अनुयायियों को महान कष्ट है।

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संन्यास परंपरा के सूर्य थे शंकराचार्य

Shankaracharya  Swami Swaroopanand Death chain of disciple tradition of emperor broken
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को प्रणाम करते एलके आडवाणी - फोटो : सोशल मीडिया।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य के ब्रह्मलीन होने की सूचना अत्यंत दुखद है। पूज्य स्वामी जी सनातन धर्म के शलाका पुरुष एवं संन्यास परंपरा के सूर्य थे। भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान को अखिल विश्व अनंत वर्षों तक स्मरण रखेगा। यह संपूर्ण समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में हम सभी को कष्ट सहने का साहस दें।

संन्यास परंपरा के सूर्य थे शंकराचार्य

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य के ब्रह्मलीन होने की सूचना अत्यंत दुखद है। पूज्य स्वामी जी सनातन धर्म के शलाका पुरुष एवं संन्यास परंपरा के सूर्य थे। भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान को अखिल विश्व अनंत वर्षों तक स्मरण रखेगा। यह संपूर्ण समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में हम सभी को कष्ट सहने का साहस दें।

विराट में व्याप्त हो गई दिव्य चेतना

जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि अनंत श्री विभूषित परिव्राजक आचार्य द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के पंच भौतिक शरीर पंचतत्व में विलीन होकर उनकी दिव्य चेतना विराट में व्याप्त हुई है। ऐसे महापुरुष का चले जाना धार्मिक आध्यात्मिक जगत की बहुत बड़ी क्षति है।

हिंदुओं की आस्था के ज्योति स्तंभ थे स्वामी स्वरूपानंद
कांग्रेस के पूर्व विधायक  अजय राय ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि महाराज जी का निधन सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति है। वह करोड़ों सनातन हिंदुओं की आस्था के ज्योति स्तंभ थे। इसके अलावा महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, गंगा सेवा अभियानम के प्रमुख राकेश चंद्र पांडेय, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के संरक्षक सतीश चंद्र मिश्रा, प्रजा नाथ शर्मा, दिग्विजय सिंह, देवेंद्र सिंह, ब्रह्मदत्त त्रिपाठी, उमेश द्विवेदी, राकेश चंद्र, सरदार सतनाम सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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